अलगवादवादी संगठनों और भाजपा में ठनी

  • 13 जनवरी 2011
उमर अब्दुल्ला
Image caption उमर अब्दुल्ला पहले ही भाजपा की इस घोषणा को लेकर अपना विरोध ज़ाहिर कर चुके हैं.

भारत प्रशासित कश्मीर की आज़ादी की मांग करने वाले संगठन जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ़) ने 26 जनवरी को लाल चौक तक मार्च निकालने की घोषणा की है.

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी की क्षेत्रीय इकाई ने 26 जनवरी के मोके पर लाल चौक में झंडा फ़हराने की मंशा ज़ाहिर की थी. माना जा रहा है कि जेकेएलएफ़ की यह घोषणा इसकी जवाबी कार्रवाई है.

जेकेएलएफ़ के इस क़दम का स्वागत करते हुए मीर वाइज़ उमर फ़ार्रुख के नेतृत्व वाली ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेस ने जेकेएलएफ़ के इस मार्च को समर्थन देने की घोषणा की है.

विरोध

इन अलगाववादी संगठनों का मानना है कि भाजपा का यह फ़ैसला है भड़काऊ और राजनीति से प्रेरित है.

जेकेएलएफ़ के अध्यक्ष यासीन मलिक का कहना है कि भाजपा वोट बैंक की राजनीति के तहत ऐसा कर रही है.

उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई भारत प्रशासित कश्मीर में शांति के लिए भाजपा की ओर से शुरु किए गए अभियान के ख़िलाफ़ है.

दलील

भारत प्रशासित कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पहले ही भाजपा की इस घोषणा को लेकर अपना विरोध ज़ाहिर कर चुके हैं.

उमर ने कहा है कि भाजपा भारत प्रशासित कश्मीर में हिंसा की आग भड़काना चाहती है. उनकी दलील है कि जब सरकार में शामिल मंत्री सभी ज़िला मुख्यालयों पर झंडा फ़हराते हैं तो संगठनों को अलग से ऐसा करने का ज़रूरत नहीं.

1992 को जनवरी माह में भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने लाल चौक पर राष्ट्रीय ध्वज फ़हराया था.

उस समय प्रशासन ने इलाके कर्फ्यू लगा दिया था. तबसे हर साल लाल चौक पर झंडा फ़हराया जाने लगा. हालांकि पिछले तीन साल से यह गतिविधि बंद है.

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