आमदनी ने बढ़ाई महंगाई: सरकार

सरकार का मानना है कि देर से हुई बारिश ने प्याज़ की क़ीमतें बढ़ाने में भूमिका निभाई.

दूध और दुग्ध उत्पादों, अंडा, मांस और मछली का दाम इसलिए बढ़े क्योंकि अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढी, लोगों की आमदनी बढ़ी और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का असर था कि ग़रीबों को ज़्यादा पैसे मिले, उनकी खपत बढ़ी और इस सबका असर था कि महंगाई बढ़ गई.

और महंगाई की मार से बचने का सबसे कारगर तरीक़ा है कृषि उपज बढ़ाना, कोल्ड स्टोरेज बढ़ाना आदि.

जहां तक त्वरित उपायों की बात है, सरकार नैफेड जैसे सरकारी संगठनों की मदद से प्याज़ 35 रुपए किलो पर बेचेगी.

सरकार को आशा है कि पाकिस्तान से आने वाला प्याज़ भी इसकी क़ीमतें में नरमी लाएगी.

भारत पाकिस्तान से 1000 टन प्याज़ का आयात करने का ठेका दे ही चुका है और भारत से इसका निर्यात भी रोक दिया गया है.

तीखी प्रतिक्रिया

सरकार के क़दमों की घोषणा पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

भाजपा की प्रवक्ता निर्मला सीतारमन का कहना था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमरीका की भाषा बोल रहे हैं. कुछ समय पहले अमरीकी प्रशासन ने कहा था कि भारत में खाद्यान्न की खपत बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमते बढ़ी हैं.

सीपीएम के नेता नीलोत्पल बसु का भी कहना था कि महंगाई को लेकर सरकार बेबुनियाद बातें कह रही है.

वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर का कहना है कि ये सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के अलग अलग रुख़ का नतीजा है.

प्रधानमंत्री इशारा कर रहे हैं कि महंगाई नरेगा जैसी योजनाओं का नतीजा है. सोनिया गांधी ग़रीबी के हित में ये योजनाएँ चलवा रही हैं.

एमजे अकबर का कहना है कि सरकार ने अब स्पष्ट कर दिया है कि आमदनी बढ़ेगी तो कीमतें भी बढ़ेगी जिसे लोगों को सहना पड़ेगा.

सरकारी उपाय

इधर सरकार का कहना है कि ज़रुरी सामान के आयात निर्यात का फैसला मौक़े और ज़रुरत को देखते हुए किया जाएगा.

खाने के तेल और दालों को सरकारी खाद्य कंपनियां खरीदेंगी और बेचेंगी.

खाने के तेल, दालों और ग़ैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक जारी रहेगी. काला बाज़ारी करने वालों औऱ जमाखोरों के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

इसके अलावा किसान मंडी और मोबाइल बाज़ार स्थापित की जाएगी ताकि माल की बिक्री ठीक से हो सके.

साथ ही जन वितरण प्रणाली को कंप्यूटरीकृत किया जाएगा ताकि इसे बेहतर बनाया जा सके.

राज्य सरकार से मंडी कर हटाने की मांग की जाएगी ताकि माल आसानी से उपभोक्ता तक पहुंचे वो भी कम क़ीमत पर.

साथ ही प्रधानमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार के नेतृत्व में एक मंत्री समूह गठित किया जाएगा जो मुद्रास्फीति पर नज़र रखेगा.

अब सरकार को आशा है कि इन सब उपायों से महंगाई पर नियंत्रण प्राप्त किया जाएगा.

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