ट्यूनीशिया में हिंसा जारी है

ट्यूनीशिया में हिंसा
Image caption ट्यूनीशिया में जानकारी है. प्रधानमंत्री ने यक़ीन दिलाया है कि सोमवार तक एक संयुक्त गठबंधन सरकार बन जाएगी.

ट्यूनीशिया में सुरक्षा बलों और राष्ट्रपति के सैनिकों के बीच राष्ट्रपति भवन के बाहर मुठभेड़ जारी है.

इस बीच ट्यूनीशिया के प्रधानमंत्री मोहम्मद घनूची ने राष्ट्रीय टेलीविज़न पर जनता को संबोधित कर कहा है कि देश की सुरक्षा को संकट में लाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.

उन्होंने ये भी दावा किया है कि सोमवार को एक संयुक्त गठबंधन सरकार की घोषणा कर दी जाएगी.

रविवार को भी ट्यूनीशिया की सड़कों पर गोलीबारी की आवाज़ें ही सुनाई देती रहीं.

सड़कों पर सेना की तैनाती और सरकारी इमारतों के बाहर टैंकों की मौजूदगी से माहौल तनावपूर्ण बना रहा.

लेकिन ख़तरा सेना से ज़्यादा पूर्व राष्ट्रपति बेन अली के समर्थकों से लग रहा है. जिन्होंने ने कई पत्रकारों को पीटा और जानकारों के मुताबिक जनता में तनाव पैदा करने में इनका हाथ है.

'गठबंधन सरकार'

इस बीच प्रधानमंत्री मोहम्मद घनूची ने राष्ट्रीय टेलीविज़न पर अपने संबोधन में कहा कि देश की सुरक्षा को संकट में डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.उन्होंने कहा कि, ''आज़ादी उतनी ही ज़रूरी है जितनी की रोटी. क्योंकि आज़ादी के बिना स्वाभिमान नहीं, आज़ादी के बिना सृजनात्मकता नहीं. सभी पक्ष ये समझते हैं और इसीलिए हम नई सरकार बनाने के लिए सहयोग जल्दी ही जुटा लेंगे. हो सकता है सोमवार को ही एक संयुक्त गठबंधन सरकार की घोषणा कर दी जाए.''

प्रधानमंत्री घनूची ने कहा कि खुदा ने चाहा तो ट्यूनीशिया पूरी दुनिया को दिखा देगा कि लोगों की आज़ादी से जीने की इच्छाशक्ति बातों से नहीं बल्कि कर्मों से पूरी की जा सकती है.

ट्यूनीशिया में लोकतांत्रिक व्यवस्था की ओर बढ़ते इन छोटे कदमों ने पड़ोसी देशों की जनता में भी जैसे नई ऊर्जा फूंक दी है.

सड़कों पर प्रदर्शन

मध्य-पूर्वी देश यमन की राजधानी सना में सैंकड़ों छात्रों ने रैली निकाली और अरब देशों के डरे और धोखेबाज़ नेताओं के ख़िलाफ़ क्रान्ति का आगाज़ किया.

यमन में एक प्रदर्शनकारी नैफ अल कीन्स ने कहा कि, ''हमें दबाने वालों के लिए हम एक संदेश लाए हैं. हम उन्हें कहना चाहते हैं कि चले जाओ. खुद चले जाओ इससे पहले कि हम तुम्हें जाने पर मजबूर कर दें. जनता की मांगे पहले ही पूरी कर दो, अपने भागने के समय के दौरान नहीं, पहले ही.''

जोर्डन की राजधानी अम्मान में संसद के सामने भी प्रदर्शन हुआ.

लेबनॉन की राजधानी में संयुक्त राष्ट्र के दफ्तर के बाहर भी कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ता इकट्ठा हुए और ट्यूनीशिया की जनता के साथ अपना समर्थन ज़ाहिर किया.

वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्यूनीशिया की गतिविधियों पर औपचारिक बयान दिया और कहा कि सरकार को देश में फिर से व्यवस्था क़ायम करने की पूरी कोशिश करनी चाहिए.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रमीन मेहमानपरस्त ने कहा, ''मेरे ख्याल से ट्यूनीशिया की मुसलमान जनता की मांगें बेन अली के शासन में शायद पूरी नहीं हुईं जिस वजह से असंतोष इतने व्यापक तौर पर सामने आया. हम उम्मीद करते हैं कि बिना हिंसा का इस्तेमल किए, इन शिकायतों को दूर कर दिया जाएगा.''

ईरान का कहना है कि ट्यूनीशिया की गतिविधियों पर उसकी नज़र इसलिए है क्योंकि वो देश इस्लामिक दुनिया में एक अहम दर्जा रखता है जो सिर्फ भौगोलिक ही नहीं है.

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