ट्यूनीशिया में राष्ट्रीय सरकार का गठन

मोहम्मद ग़नूशी
Image caption ट्यूनीशिया में नई राष्ट्रीय सरकार के गठन की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री मोहम्मद ग़नूशी

ट्यूनीशिया में जन विद्रोह के बाद राष्ट्रीय सरकार का गठन कर दिया गया है.पिछले सप्ताह लोगों के हिंसक प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति ज़ैन अल आबिदिन बिन अली देश छोड़कर सऊदी अरब भाग गए थे.

प्रधनमंत्री मोहम्मद ग़नूशी ने सोमवार शाम नई सरकार की घोषणा की.

नई सरकार में पिछली सरकार के कुछ मंत्रियों समेत विपक्षी दलों के भी कुछ नेताओं को शामिल किया गया है.

प्रधानमंत्री ग़नूशी नई सरकार का नेतृत्व करेंगें. वो पिछली सरकार में भी प्रधानमंत्री की ज़िम्मेदारी संभाल रहे थे.ग़नूशी ने कहा कि नई सरकार की प्राथमिकता देश में जल्द से जल्द आम चुनाव करवाना है.

उन्होंने राजनीतिक आज़ादी दिए जाने और मीडिया की स्वतंत्रता के लिए कई क़दम उठाने की घोषणा की.

ग़नूशी ने कहा कि, ''ट्यूनीशिया में सभी राजनीतिक दलों को काम करने की आज़ादी दी जाएगी, राजनीतिक बंदियों को रिहा कर दिया जाएगा और मीडिया को पूरी स्वतंत्रता दी जाएगी.''

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार ग़नूशी ने कहा,''हमलोगों ने फ़ैसला किया है कि अपनी विचारधारा, विश्वास और अलग राय रखने के कारण जेलों में बंद सभी लोगों को रिहा किया जाएगा.''

नई सरकार ने ट्यूनीशिया के सूचना मंत्रालय को भंग करने का फ़ैसला किया है.

नया मंत्रीमंडल

विदेश मंत्री, आंतरिक मामलों के मंत्री और रक्षा मंत्री अपने पद पर बने रहेंगे जबकि कई प्रमुख विपक्षों नेताओं को अहम मंत्रालय सौंपे गए हैं.

विपक्षी इत्तजदीद पार्टी के प्रमुख अहमद इब्राहिम को उच्च शिक्षा मंत्री बनाया गया है, जबकि यूनियन ऑफ़ फ़्रीडम एंड लेबर के मुस्तफ़ा बिन जाफ़र को स्वास्थ मंत्रालय की ज़िम्मेदारी दी गई है.

प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक पार्टी के संस्थापक नजीब चेबी ट्यूनीशिया के नए विकास मंत्री होंगे.

अपुष्ट ख़बरों के अनुसार प्रमुख ब्लॉगर सलीम अमामो को युवा एवं खेल मंत्री बनाया गया है.

नई सरकार की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ग़नूशी ने कहा कि वो राष्ट्रपति ज़ैन अल आबिदिन के दमनकारी शासन से आगे बढ़ना चाहते हैं.

उन्होंने कहा,''हमलोग सभी ट्यूनीशियाई नागरिकों के दिलों में शांति और सुरक्षा का माहौल स्थापित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को और तेज़ करने के लिए प्रतिबद्द हैं. लोगों की सुरक्षा के साथ साथ राजनीतिक और आर्थिक सुधारों को लागू करना हमारी प्राथमिकता है.''

लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों और संवाददाताओं का मानना है कि पूरानी सत्ता के कई प्रमुख मंत्रियों को नई सरकार में शामिल किए जाने के फ़ैसले को सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे लोग स्वीकर करेंगे या नहीं ये कहना मुश्किल है.

शांति की अपील

एक विपक्षी नेता अहमद बोआज़ी ने कहा कि उन्हें यक़ीन है कि प्रदर्शनकारी अब शांत हो जाएंगे.

अहमद बोआज़ी ने बीबीसी को बताया कि सत्ताधारी पार्टी को पूरी तरह ख़त्म कर देना संभव नहीं है. उन्होंने इराक़ में सद्दाम हुसैन की बाथ पार्टी के भंग किए जाने के बाद वहां फैली अव्यवस्था का उदाहरण देते हु्ए कहा कि ऐसी मांग करना वास्तविकता से परे है.

उन्होंने कहा, ''हमलोग नई सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे और आगे बढ़ेंगे और अगर ये सरकार काम नहीं करेगी तो हम फिर सड़कों पर उतर सकते हैं.''

ट्यूनीशिया में बढ़ती बेरोज़गारी और खाद्ध पदार्थों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ पिछले तीन हफ़्तों से लोग सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और राष्ट्रपति ज़ैन अल आबिदिन बिन अली से इस्तीफ़ा देने की मांग कर रहे थे.

राष्ट्रपति बिन अली 1987 से ट्यूनीशिया की सत्ता पर आसीन थे.

राष्ट्रपति ने पिछले गुरुवार यानि 13 जनवरी को ऐलान किया था कि वो 2014 तक सत्ता छोड़ देंगें लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना था कि देश में प्रजातंत्री की बहाली और बदलाव के लिए राष्ट्रपति का तत्काल सत्ता छोड़ना ज़रूरी है.

आख़िरकार पिछले शुक्रवार यानि 14 जनवरी को हुए भारी प्रदर्शन को देखते हुए राष्ट्रपति ने सत्ता छोड़ दिया और पूरे परिवार के साथ सऊदी अरब चले गए.

उसेक बाद प्रधानमंत्री मोहम्मद ग़नूशी ने सत्ता संभाला ली और तभी से वहां आपातकाल जारी है.

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