वर्ष 2010 रहा सबसे गर्म साल

  • 20 जनवरी 2011

संयुक्त राष्ट्र की संस्था विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) का कहना है कि यूरोप में कड़ाके की ठंड के बावजूद पिछला साल सबसे ज़्यादा गर्म वर्ष रहा है.

संस्था के मुताबिक 1990 तक के आँकड़ों की तुलना में पिछले वर्ष औसत तामपान 0.5 डिग्री सेल्सियस से भी ज़्यादा रहा है.सबूत के तौर पर संगठना का कहना है कि जलवायु परिवर्तन हो रहा है.

पिछले महीने यूरोप में कंपकंपाने वाली ठंड पड़ी और कई जगह भारी बर्फ़बारी भी हुई. लेकिन विश्व मौसम विज्ञान संस्था की मानें तो धरती लगातार गर्म हो रही है.

उपलब्ध रिकॉर्डों के मुताबिक 1850 के बाद से वर्ष 2010 में औसत तापमान सबसे ज़्यादा रहा.इतना ही नहीं आर्कटिक में बर्फ़ की परत अपने सबसे कम स्तर पर थी.

बढ़ता तापमान

डब्ल्यूएमओ के महासचिव मिशेल जारुड कहते हैं कि ये ताज़ा आँकड़ें उन आलोचकों का मुहँ बंद कर देंगे जो दावा करते हैं कि जलवायु परिवर्तन और ग्रीनहाउस गैसों का तापमान पर असर एक मिथक है.

मौसम वैज्ञानिक संकेत देते रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन का मतलब होगा कि मौसम में तेज़ी से बदलाव देखा जाए- या तो बहुत ठंड या बहुत गर्मी या ज़्यादा बारिश.. यानी और प्राकृतिक आपदाएँ.

विश्व मौसम विज्ञान संस्था का कहना है कि 2010 सबसे गर्म साल था और इसी साल पाकिस्तान में ज़बरदस्त बाढ़ भी आई और इसी वर्ष रूस में बेहद गर्मी रही जिससे जंगलों में आग लग गई .संस्था के मुताबिक ये सब बातें मौसम वैज्ञानिकों की आशंकाओं से मेल खाती हैं.

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