क़ीमतें कर रही है बजट फ़ेल: विश्व खाद्य कार्यक्रम

खेती

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने चेतावनी दी है कि अगर खाद्यान्न की क़ीमतें ऐसे ही बढ़ती रहीं तो उसका बजट फ़ेल हो जाएगा.

विश्व खाद्य कार्यक्रम 1990 से खाद्यान्नों की क़ीमतों को रिकॉर्ड कर रहा है और उसका कहना है कि तब से अब तक खाद्यान्न की क़ीमतें आज रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच गई है.

आपको याद होगा कि 2008 में खाने पीने के सामान की बढ़ी हुई क़ीमतों की वजह से कई जगह दंगे हो गए थे.

दुनियाभर में विश्व खाद्य कार्यक्रम नौ करोड़ लोगों को खाद्य सहायता देता है और ये खाद्यान्न वो उसी देश से ख़रीदता है जहाँ उसे सहायता देनी होती है.

इस साल उसका बजट पिछले साल की ही तरह छह अरब डॉलर का ही है.

विश्व खाद्य कार्यक्रम की कार्यकारी उप निदेशक शीला सिसुलू का कहना है, “हमारे दानकर्ताओं के पास भी पैसे की कमी है और वो चाहते हैं कि बहुत सोच समझकर कर एक एक पैसा खर्च करें. बजट टाइट है. अभी तक ये बात संकट की स्थिति में नहीं पहुंची है पर अगर क़ीमतें यूँ ही बढ़ती रहीं और हमें विश्व बाज़ार से माल ख़रीदना पड़ा तो मामला गंभीर हो सकता है.”

विश्व खाद्य कार्यक्रम का कहना है कि जिस देश में खाद्य सहायता देनी होती है वहीं से माल ख़रीदने से वहाँ के कृषि क्षेत्र को सहायता मिलती है और अर्थव्यवस्था में सुधार आ जाता है.

स्थिति पर नज़र

सिसुलू का कहना था कि दक्षिण और पूर्वी अफ्रीका के कुछ हिस्सों से अच्छी फ़सल के समाचार आ रहे हैं.

उनका कहना था, “स्थानीय बाज़ार में क़ीमतें विश्व क़ीमतों से टक्कर ले रही है. पर अगर क़ीमतें बढ़ती रही, बाज़ार में अतिरिक्त माल नहीं बचा तो स्थिति चिंताजनक हो जाएगी.”

विश्व खाद्य कार्यक्रम बाज़ार पर पैनी नज़र रख रहा है.

अभी दुनिया में गेहूं की मांग बढ़ रही है आपूर्ति कम है, ऐसे में गेहूं उत्पादन करने वाले किसी भी क्षेत्र में अगर फसल को नुक़सान होता है तो यूरोपीय बाज़ार में क़ीमतें 2008 के रिकॉर्ड को तोड़ सकती है.

पाकिस्तान में बाढ़ और अब ब्राज़ील और अर्जेंटीना में बाढ़ के कारण आने वाले समय में दिक्क़ते आ सकती हैं क्योंकि ये सभी गेहूं उत्पादन के बड़े क्षेत्र है.

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