'पर्ल के असल हत्यारों पर मामला नहीं चलाया'

उमर शेख़
Image caption उमर शेख़ ने ख़ुद को एक आईएसआई अधिकारी के हवाले किया था

वॉल स्ट्रीट जर्नल के पत्रकार डेनियल पर्ल के अपहरण और हत्या के मामले की जाँच कर रहे कुछ खोजी पत्रकारों ने पाकिस्तानी और अमरीकी अधिकारियों की जाँच पर कई सवाल उठाए हैं.

वॉल स्ट्रीट जर्नल के 38 वर्षीय पत्रकार डेनियल पर्ल का अपहरण कराची से 23 जनवरी 2002 को हुआ था जब वे चरमपंथ से संबंधित एक ख़बर के लिए खोजबीन कर रहे थे.

उसी साल फ़रवरी 21 को एक वीडियो पाकिस्तान स्थित अमरीकी अधिकारियों को भेजा गया जिसमें पर्ल को जान से मारे जाते हुए दिखाया गया था. तीन महीने बाद उनका शव कराची के बाहरी इलाक़े में एक कब्र में पाया गया था.

अमरीका के जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय, इंटरनेशनल कॉंसोर्टियम ऑफ़ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स और वॉशिंगटन स्थित सेंटर फ़ॉर पब्लिक इंटेग्रिटी ने संयुक्त तौर पर पर्ल प्रॉजेक्ट के तहत तीन साल तक इस मामले की जाँच के बाद जो पाया, उसे सार्वजनिक किया है.

प्रॉजेक्ट पर्ल में पाया गया है कि जाँच पूरी करने की जल्दबाज़ी में पाकिस्तानी अधिकारियों ने जानबूझकर चार ऐसे लोगों पर हत्या करने का दोष लगा दिया जो अपहरण से तो संबंधित थे लेकिन तब घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे जब पर्ल की हत्या की गई.

ख़ालिद ने दोष माना, उमर को सज़ा

इस मामले में पाकिस्तानी मूल के ब्रितानी नागरिक अहमद उमर सईद शेख़ और तीन अन्य को पाकिस्तानी अधिकारियों ने हत्या के कुछ ही महीने बाद गिरफ़्तार किया और उनके ख़िलाफ़ मुकदमा चलाया गया. इसके बाद उन्हें हत्या और अपहरण का दोषी पाया गया.

जहाँ शेख़ को जुलाई 2002 में मौत की सज़ा सुनाई गई, वहीं तीन अन्य को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई.

Image caption डेनियल पर्ल वॉल स्ट्रीट जर्नल के दक्षिण एशिया ब्योरो प्रमुख थे

इसके बाद इन लोगों की अपील पर कई बार सुनवाई हो चुकी है लेकिन फ़िलहाल मामला अदालत में ही है.

महत्वपूर्ण है कि जब पाकिस्तानी अधिकारी वर्ष 2002 में शेख को ख़ोज रहे थे तब शेख़ ने आईएसआई के पूर्व अधिकारी एजाज़ शाह के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया लेकिन अमरीकी अधिकारियों को इसकी जानकारी एक हफ़्ते बाद मिली.

प्रॉजेक्ट पर्ल के जाँचकर्ताओं के मुताबिक, "अमर सईद शेख़ ने (आईएसआई अधिकारी) शाह के पास शरण पारिवारिक संबंधों के कारण ली ताकि उनकी ओर नर्मी बरती जाए या फिर इसलिए कि शेख़ और आईएसआई का पुराना इतिहास था, ये गुत्थी अभी सुलझी नहीं है."

इस प्रॉजेक्ट में 27 लोगों की कम से कम तीन भिन्न चरमपंथी गुटों की पहचान की गई है और ये भी कहा गया है कि मामले से संबंधित कम से कम 14 लोग अब भी आज़ाद हैं. इनमें गार्ड, ड्राइवर और जो लोग जानकारी दिलाने में पर्ल की 'मदद' कर रहे थे, वे शामिल हैं.

ग़ौरतलब है कि दूसरी ओर ग्वांतानामों बे में क़ैद अल क़ायदा की रणनीति बनाने वाले ख़ालिद शेख़ मोहम्मद ने अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी एफ़बीआई को बताया कि उन्होंने ख़ुद पर्ल का गला काटा था और उनका सर धड़ से अलग किया था ताकि उन्हें मौत की सज़ा मिले और इस हत्या को प्रॉपेगेंडा के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके.

एफ़बीआई और सीआईए ने 'वेन-मैचिंग' यानी नस की पहचान करने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जिससे उस आदमी के हाथ की पहचान करने की कोशिश की गई जिसने वीडियो में डेनियल पर्ल के सिर को पकड़ रखा था. इसके बाद उसे ख़ालिद शेख़ मोहम्मद के हाथ के साथ मिलाया गया.

प्रॉजेक्ट पर्ल के जाँचकर्ताओं का दावा है कि पर्याप्त सुराग होने के बावजूद अमरीकी और पाकिस्तानी अधिकारियों ने ग़लत संदिग्धों का पीछा किया जिससे दोषियों को पर्ल की हत्या करने और भागने का मौक़ा मिल गया.

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