बक़ाए के मामले में अब ब्रितानी कंपनी भी

  • 21 जनवरी 2011
Image caption एसआईएस लाइव ने राष्ट्रमंडल खेलों के उदघाटन समारोह के प्रसारण में अहम भूमिका निभाई थी

राष्ट्रमंडल खेलों के उदघाटन और समापन समारोह में हिस्सा लेने वाली कंपनियों के बक़ाया भुगतान के मामले में अब ब्रितानी प्रसारण कंपनी एसआईएस लाइव भी शामिल हो गई है.

भारतीय मीडिया में आई कुछ रिपोर्टों के अनुसार एसआईएस की बक़ाया राशि का कुछ हिस्सा रोकने की चर्चा है जिसके बाद भारत में ब्रितानी उच्चायुक्त सर रिचर्ड स्टैग ने कंपनी का पैसा तुरंत अदा करने पर ज़ोर दिया है.

एसआईएस लाइव का भारत में प्रसार भारती से प्रसारण संबंधी अनुबंध था और सर रिचर्ड के अनुसार कंपनी का अभी 96 करोड़ रुपए बक़ाया है.

उन्होंने कहा, "हम इस मसले को काफ़ी अहमियत देते हुए आगे बढ़ा रहे हैं. एसआईएस लाइव एक प्रमुख ब्रितानी प्रसारक है, जिसके पास 70 वर्षों से ज़्यादा का अनुभव है. एसआईएस लाइव ने अपने कॉन्ट्रैक्ट का पूरी तरह पालन किया जिसे देखते हुए अब उसका पूरा भुगतान होना चाहिए."

इससे एक ही दिन पहले कुछ ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों ने भी बयान जारी करके कहा था कि उनका भुगतान बक़ाया है.

जाँच जारी

ऐसी ही एक कंपनी स्पेक्टाक के प्रमुख रिक बर्च ने तो बक़ाया राशि की वसूली के लिए क़ानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.

इस बीच खेल मंत्रालय का प्रभार सँभालने वाले अजय माकन ने बयान जारी करके कहा था कि सभी बक़ाया धन 10 दिन के भीतर दे दिया जाना चाहिए.

ब्रितानी उच्चायोग के सूत्रों के मुताबिक़ अजय माकन के इसी बयान के बाद ब्रिटेन ने एसआईएस के इस भुगतान के मसले को ज़ोर-शोर से उठाया है.

दरअसल एसआईएस लाइव की राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़ी आमदनी पर भारत के आयकर विभाग की जाँच चल रही है.

एसआईएस लाइव पर आरोप है कि कंपनी ने कर की चोरी की और प्रसार भारती पर आरोप लगे कि जानबूझ कर इस चोरी की अनदेखी की गई.

प्रसार भारती पर इससे पहले आरोप लगा था है कि आयकर विभाग की जाँच के बावजूद एसआईएस लाइव के क़रीब ढाई सौ करोड़ रुपए के क़रार का 60 फ़ीसदी, कंपनी को पेशगी के तौर पर अदा कर दिया गया.

इसके बाद राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बीएस लाली के ख़िलाफ़ वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सु्प्रीम कोर्ट से जाँच की स्वीकृति भी दे दी थी.

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