स्टेन्स मामले में धर्म परिवर्तन पर सुप्रीम कोर्ट ने सुर बदला

  • 25 जनवरी 2011
ग्राहम स्टेन्स

सर्वोच्च न्यायालय ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बच्चों की हत्या करने के लिए दोषी ठहराए गए दारा सिंह की आजीवन कारावास की सज़ा बरकरार करते हुए अपनी कुछ टिप्पणियों को वापस ले लिया है.

अपने 76 पन्नों के आदेश में जस्टिस पी सदालसिवन और बीएस चौहान की खंडपीठ ने अपने दो वक्तव्यों को वापस ले लिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी, “हम उम्मीद करते हैं कि महात्मा गांधी का जो स्वप्न था कि धर्म राष्ट्र के विकास में एक सकारात्मक भूमिका निभाएगा वो पूरा होगा. किसी की आस्था को ज़बरदस्ती बदलना या फिर ये दलील देना कि एक धर्म दूसरे से बेहतर है उचित नहीं है.”

इसके बदले अदालत ने अब कहा है कि “इस बात में कोई विवाद नहीं कि किसी और की धार्मिक आस्था को किसी तरह से भी प्रभावित करना न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता. ”

सर्वोच्च न्यायालय ने दारा सिंह और उनके साथी महेंद्र हेंब्रम को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाते हुए एक तरह से उनके काम को ऐसा कह कर न्यायोचित ठहराने की कोशिश की थी कि चूंकि उस इलाके में धर्म परिवर्तन चल रहा था, उसी परिप्रेक्ष्य में ग्राहम स्टेन्स की हत्या हुई थी.

अब न्यायालय ने कहा है, “बारह सालों बाद उच्च न्यायालय की उम्र क़ैद की सज़ा के साथ कोई दखलअंदाज़ी न की जाए.”

सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों की आलोचना हुई थी. शायद उसी के मद्देनज़र अदालत ने अपना टिप्पणी बदली.

क्या था मामला

स्टेंस और उनके बेटों को 1999 में उड़ीसा के क्योंझर ज़िले में ज़िंदा जला दिया गया था.

दिसंबर की ठंडी रात में स्टेंस अपने घर के रास्ते में एक कार के अंदर अपने बेटों के साथ सो रहे थे.

मनोहरपुर गांव में एक भीड़ ने उनकी गाड़ी पर पेट्रोल छिड़ककर उसमें आग लगा दी.

स्टेंस ने कार से निकलकर भागने की भी कोशिश की लेकिन भीड़ ने कथित रूप से उन्हें निकलने नहीं दिया.

स्टेंस वहां 30 सालों से कुष्ठ रोगियों के साथ काम कर रहे थे लेकिन उनपर वहां धर्मांतरण करवाने का भी आरोप लगा था.

दारा सिंह के संबंध दक्षिणपंथी बजरंग दल से भी बताए जाते हैं.

उड़ीसा हाई कोर्ट ने दारा सिंह को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी.

वहीं केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआई ने इस मामले में मौत की सज़ा की मांग की थी.

कुछ समय पूर्व सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद दारा सिंह के वकील शिवशंकर मिश्रा न पत्रकारों को बताया था कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस बात के पक्के सबूत मिले हैं कि स्टेंस जबरन धर्म परिवर्तन कर रहे थे. और अदालत ने कहा कि जबरन धर्म परिवर्तन समाज के लिए अच्छा नहीं है.

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