मिस्र में कई जगह प्रदर्शन हिंसक हुआ

काहिरा में प्रदर्शन

मिस्र के कई शहरों में अधिकारियों की चेतावनी को अनदेखा करते हुए हज़ारों सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे हैं और कई जगह से उसके हिंसक हो जाने की ख़बरें आ रही हैं.

राजधानी काहिरा में हज़ारों प्रदर्शनकारियों के साथ हुई झड़पों के बाद लाठीचार्ज किया है और आँसूगैस के गोले छोड़े हैं. कुल मिलाकर सात सौ से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है.

पूर्वी शहर स्वेज़ में प्रदर्शनकारियों ने एक सरकारी इमारत में आग लगा दी है और दूसरे शहरों में उन्होंने जगह-जगह टायर जलाए हैं और पुलिस पर पथराव किया है

इन प्रदर्शनों के बीच दो लोगों की मौत की ख़बरें मिली हैं लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन मौतों संबंध प्रदर्शनों से है या नहीं. इनमें एक पुलिस वाला है और एक आम नागरिक.

सरकार विरोधी प्रदर्शन: तस्वीरों में

मिस्र में ब्रिटेन के राजदूत ने बीबीसी को बताया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने एहतियात के साथ कार्रवाई की है लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसके विपरीत कहा है कि पुलिस की ज़्यादतियों की वजह से ही हिंसा भड़की.

इस बीच अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने दोहराया है कि मिस्र की सरकार को राजनीतिक और आर्थिक सुधार लागू करने चाहिए.

चेतावनी

मिस्र में प्रदर्शनों पर क़ानूनी रुप से रोक लगी हुई है.

मिस्र के आंतरिक सुरक्षा मामलों के मंत्री ने इन प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि इस तरह के प्रदर्शनों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

उनका कहना है कि यदि सरकार के ख़िलाफ़ कोई भी सड़कों पर उतरेगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी.

Image caption लोग आपातकाल हटाने की मांग कर रहे हैं

प्रधानमंत्री अहमद नाज़िफ़ ने कहा है कि सरकार 'वैधानिक ढंग से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' के हक़ में है.

लेकिन अमरीका ने कहा है कि सरकार को प्रदर्शनों पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाना चाहिए.

बीबीसी के काहिरा संवाददाता का कहना है कि सरकार ने इन विरोध प्रदर्शनों पर अपना जाना पहचाना रुख़ अपनाया है और वह राजनीतिक समस्या को क़ानून व्यवस्था की समस्या की तरह देख रही है.

इस बीच समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ख़बर दी है कि प्रदर्शनकारी काहिरा के सेंट्रल कोर्ट कॉम्पलेक्स में एकत्रित हो गए हैं.

उन्होंने स्वेज़ शहर में एक सरकारी इमारत में पेट्रोल बम फेंककर उसमें आग लगा दी है वहीं सत्ताधारी नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी के मुख्यालय को भी घेर लिया गया है.

एक प्रदर्शनकारी मुस्तफ़ा अल-शफ़ी ने बीबीसी से कहा, "मैं इस तानाशाही का अंत चाहता हूँ. मुबारक के तीस साल बहुत हुए. अब हम आपातकाल से परेशान हो गए हैं. क़ीमतें दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही हैं."

राष्ट्रपति होस्नी मुबारक मिस्र पर वर्ष 1981 से शासन कर रहे हैं.

उनकी सरकार विरोध को कम ही बर्दाश्त करती है और विपक्षी दलों के प्रदर्शनों को अक्सर रोक दिया जाता है.

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