हिंसा के बीच नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति

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मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने देश में नए प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति को नियुक्त किया है. देश में चल रहे ज़ोरदार विरोध प्रदर्शनों के मद्देनज़र उन्होंने कैबिनेट को बर्ख़ास्त कर दिया था.

पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री अहमद शफ़ीक़ को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है. देश के ख़ुफ़िया प्रमुख उमर सुलेमान को उप राष्ट्रपति नियुक्त किया गया है.

होस्नी मुबारक के 30 वर्षों के शासनकाल में ये पहला मौक़ा है, जब किसी को उप राष्ट्रपति नियुक्त किया गया है. उमर सुलेमान को राष्ट्रपति का क़रीबी माना जाता है.

इस बीच सेना की ओर से घोषित कर्फ़्यू के बावजूद मिस्र की राजधानी काहिरा की सड़कों पर हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारी जमे हुए हैं. प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

आंतरिक मामलों के मंत्रालय के कार्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प भी हुई है. झड़प में कुछ लोगों के हताहत होने का भी समाचार है.

सेना ने स्थानीय समय के मुताबिक़ शाम चार बजे से सुबह आठ बजे तक कर्फ़्यू की घोषणा की है और लोगों को चेतावनी दी है कि वे सड़कों पर एकत्रित न हों. लेकिन प्रदर्शनकारियों पर इसका असर नहीं.

काहिरा के अलावा स्वेज़ और एलेक्ज़ैंड्रिया में भी प्रदर्शन के दौरान हिंसा की ख़बर है. कुछ पुलिस स्टेशनों में आग लगा दी गई है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ शुक्रवार की नमाज़ के बाद से प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अभी तक 38 लोगों की जान जा चुकी है.

'भारतीय सुरक्षित'

इस बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा है कि मिस्र में भारतीय दूतावास वहाँ भारतीय समुदाय के लोगों से संपर्क में है और सभी भारतीयों के सुरक्षित होने की रिपोर्ट है.

विदेश मंत्रालय का कहना है कि दूतावास ने काहिरा में एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है.

लोग इन नंबरों पर दूतावास के नियंत्रण कक्ष से संपर्क कर सकते हैं. नंबर हैं- +202 27360556,+202 2736 0052, +202 2735 6168

विदेश मंत्रालय ने लोगों को सलाह दी है कि मिस्र की मौजूदा स्थिति को देखते हुए बिना बहुत ज़रूरी के वहाँ जाने से बचें.

साथ ही मिस्र के घटनाक्रम की तुलना ईरान में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों से करते हुए ईरान के विपक्षी नेता मीर हुसैन मुसावी ने कहा है कि अगर सरकारें आवाम की बात नहीं सुनेंगी तो जनता के पास इस तरह आंदोलन और प्रदर्शन करने के अलावा कोई चारा नहीं बचता.

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Image caption सेना पर बल प्रयोग का आरोप लगा है

ग़ौरतलब है कि 2009 में ईरान में हुए चुनावों में मुसावी की विवादास्पद हार के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने तेहरान की सड़कों पर प्रदर्शन किए थे.

संबोधन

शुक्रवार को हुए ज़ोरदार प्रदर्शन के बावजूद राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने अपना रुख़ और कड़ा कर लिया था.

राष्ट्रपति मुबारक ने सुरक्षा बलों की ओर से हो रही कड़ी कार्रवाई को उचित बताया था. उन्होंने कहा था कि वे प्रदर्शनकारियों की पीड़ा समझते हैं लेकिन आज़ादी और अव्यवस्था के बीच बहुत पतली लकीर होती है और वे देश को अस्थिर नहीं होने देंगे.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मिस्र के अधिकारियों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग न करें.

ओबामा ने बताया कि उन्होंने मिस्र के राष्ट्रपति से बात की है और अपील की है कि वे जनता का ख़्याल करें.

उन्होंने मिस्र की सरकार से ये भी अपील की कि वो इंटरनेट सेवा, सोशल नेटवर्किंग साइट और मोबाइल सेवाओं के मामले में हस्तक्षेप न करे.

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