तालिबान का क्रूर चेहरा

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अफ़गान अधिकारियों ने कहा है कि जिन लोगों ने उत्तरी अफ़गानिस्तान में एक जोड़े की पत्थर मार कर हत्या कर दी थी उन्हें सज़ा दी जाएगी.

अधिकारियों का ये बयान उस दर्दनाक घटना की फ़ुटेज सामने आने का बाद आया है.

कुंडूज़ प्रांत के दश्ते अर्ची ज़िले के इस जोड़े पर 'अनैतिक संबंध' बनाने का आरोप था.

ये घटना पिछले साल अगस्त की है.

सामने आई फ़ुटेज में हज़ारों लोगों को देखा जा सकता है लेकिन उनमें से किसी पर भी अब तक कोई केस दर्ज नहीं हुआ है. ये क्षेत्र अब भी तालिबान के कब्ज़े में है.

फ़ुटेज को देखने के बाद क्षेत्रीय पुलिस प्रमुख जनरल दाऊद दाऊद ने कहा है कि जो लोग इस हत्या के लिए ज़िम्मेदार हैं उन्हें पहचाना जा सकता है.

जनरल दाऊद ने बीबीसी को बताया, “वहां विशेष पुलिस दस्ता भेजा जाएगा. हम उन्हें ढूंढेंगे और उन्हें सज़ा दी जाएगी. ”

मोबाइल फ़ोन की गई रिकॉर्डिंग को हाल ही में अफ़गान और नेटो अधिकारियों ने देखा है. वीडियो का अधिकतर भाग इतना विचलित करने वाला है कि उसे दिखाया भी नहीं जा सकता.

ख़ून से लथपथ

वीडियो की शुरुआत में 25 साल की सिद्दक़ा कमर तक गहरे एक गड्डे में खड़ी हुई दिखती है.

सिद्दक़ा एक नीले बुरक़े में है. हज़ारों ग्रामीणों की मौजूदगी में दो मुल्ला सज़ा सुनाने जा रहे हैं. तालिबान लड़ाकों की मौजूदगी में सिद्दक़ा को दोषी पाया जाता है और उसे संगसार से मौत की सज़ा सुनाई जाती है.

पत्थरबाज़ी महज़ दो मिनट चलती है. सैंकड़ों छोटे-बड़े पत्थर सिद्दक़ा के ज़िस्म पर फ़ेके जाते हैं. वो एक बार उस गड्डे से बाहर निकलने की कोशिश करती है लेकिन पत्थरों की बौछार उसे रोक देती है.

तभी एक बड़ा सा पत्थर उसके सिर पर लगता है और वो गड्डे में गिर जाती है.

लेकिन सिद्दक़ा अब भी जीवित है. इसी बीच मुल्लाओं को ये कहते हुए सुना जा सकता है कि उसे छोड़ दिया जाए.

लेकिन तभी राइफ़ल से लैस एक तालिबान लड़ाका आगे बढ़ता है और सिद्दक़ा पर तीन गोलियां चला देता है.

उसके बाद सिद्दक़ा के प्रेमी ख़य्याम को भीड़ के सामने लाया जाता है.

उस पर हमला और भी ज़ोर से किया जाता है. सिर झुकाए ज़मीन पर बैठे ख़य्याम को रोते-बिलखते हुए सुना जा सकता है लेकिन जल्द ही वो ख़ामोश हो जाता है.

‘भय और नफ़रत’

इससे पहले ख़य्याम और सिद्दक़ा पाकिस्तान भाग गए थे लेकिन उन्हें झूठे वादे कर वापस बुला लिया गया था.

तालिबान के प्रवक्ता ज़बीउल्ली मुजाहिद ने जोड़े को मिली सज़ा का बचाव किया है.

जो भी इस्लाम को समझता है वो ये जानता है कि कि क़ुरान में संगसारी का प्रावधान है और यही इस्लामी क़ानून है. कुछ लोग इसे अमानवीय बताते हैं लेकिन ये कहना पैग़म्बर का अपमान है. वो पश्चिमी सोच को इस देश में लाना चाहते हैं.

ज़बीउल्लाह मुजाहिद, तालिबान प्रवक्ता

मुजाहिद ने टेलीफ़ोन पर बताया, “जो भी इस्लाम को समझता है वो ये जानता है कि कि क़ुरान में संगसारी का प्रावधान है और यही इस्लामी क़ानून है. कुछ लोग इसे अमानवीय बताते हैं लेकिन ये कहना पैग़म्बर का अपमान है. वो पश्चिमी सोच को इस देश में लाना चाहते हैं.”

नेटो के वरिष्ठ ग़ैर-सैनिक प्रतिनिधि मार्क सेडविल के अनुसार इस्लामी न्याय के प्रति तालिबान का नज़रिया ‘भयावह’ है.

सेडविल कहते हैं कि अफ़गानिस्तान सरकार को देश में क़ानून व्यवस्था सुधारने की ज़रुरत है.

अफ़गानिस्तान स्वतंत्र मानवाधिकार आयोग के अहमद नादिर नादरी ने पूरा वीडियो देखा है. नादरी कहते हैं कि इस घटना से तालिबान के शासनकाल की यादें ताज़ा हो गई हैं.

नादरी ने कहा, “इसे देखने के बाद मुझे तालिबान के दिनों में काबुल और देश के अन्य हिस्सों के हालात ही याद नहीं आए बल्कि इससे एक डर का भी अहसास हुआ और तालिबान के प्रति और नफ़रत बढ़ गई. ये डर भी लगा कि अगर तालिबान वापस सत्ता में आया तो क्या होगा. ”

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