मिस्र से विदेशियों को निकालने का अभियान

  • 31 जनवरी 2011
सरकार विरोधी प्रदर्शन इमेज कॉपीरइट Reuters (audio)

मिस्र से विदेशी नागरिक जाने लगे हैं और विरोध प्रदर्शनों के कारण फंसे विदेशों नागरिकों को निकालने का अभियान विभिन्न देशों ने शुरू कर दिया है.

अमरीका ने मिस्र में फंसे अपने हज़ारों नागरिकों को निकालने के लिए विशेष उड़ानों की व्यवस्था की है.

चीन और जापान भी अपने नागरिकों को वहाँ से निकालने के लिए विशेष विमान भेज रहा है.

भारत के लगभग 225 नागरिक विशेष विमान से सोमवार को मुंबई पहुँच रहे हैं.

इधर ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि काहिरा के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हज़ारों विदेशी फंसे हुए हैं.

अनेक देशों ने अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे मिस्र की यात्रा न करें, हालांकि मिस्र के मुख्य पर्यटक स्थल विरोध प्रदर्शनों से प्रभावित नहीं हुए हैं.

भारत ने भेजा विशेष विमान

प्रदर्शनों की तस्वीरें

दूसरी ओर मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने राजधानी काहिरा और अन्य शहरों पर नियंत्रण सुनिश्चित करने की कोशिश तेज़ कर दी है. ये विरोध प्रदर्शन उन्हें सत्ता से हटाने के लिए हो रहे हैं.

पुलिस को फिर से सड़कों पर गश्त के लिए कहा गया है और रात का कर्फ़्यू जारी रखने का आदेश दिया गया है.

हालांकि रविवार रात को लगभग एक हज़ार प्रदर्शनकारी कर्फ़्यू का उल्लंघन करते हुए काहिरा के तहरीर स्कवायर पर जमा हो गए थे.

साथ ही राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने अपनी नई कैबिनेट को आर्थिक सहायता को जारी रखने, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और राजनीतिक सुधारों की दिशा में काम करने का निर्देश दिया है.

मिस्र के सरकारी टीवी ने होस्नी मुबारक का एक पत्र पढ़ा जो उन्होंने नवनियुक्त प्रधानमंत्री अहमद शफीक़ को लिखा है.

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Image caption काहिरा के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हज़ारों विदेशी फंसे हुए हैं

इसमें उन्होंने आर्थिक नीतियों पर लोगों की चिंताओं को देखते हुए उन पर ध्यान देने को कहा है.

साथ ही उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों से बातचीत कर संवैधानिक और विधायी सुधार की ज़रूरत पर बल दिया है ताकि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकी.

इधर व्हाइट हाउस ने कहा है कि राष्ट्रपति ओबामा ने तुर्की, इसराइल, सऊदी अरब और ब्रिटेन के नेताओं से टेलीफ़ोन कर मिस्र की स्थिति पर चर्चा की है.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने मिस्र में शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक सत्ता परिवर्तन की अपील की है.

उन्होंने कहा है कि अमरीका एक ऐसी सत्ता परिवर्तन के ख़िलाफ़ है जो जनता की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं पर पानी फेर दे.

ये पहली बार है जब अमरीका ने इतने स्पष्ट शब्दों में राष्ट्रपति होस्नी मुबारक की सत्ता से हटकर एक अलग लोकतांत्रिक व्यवस्था की बात की है. अमरीका पिछले कई दशकों से मुबारक की सत्ता का साथ देता रहा है.

प्रदर्शन जारी

विपक्षी नेता अल बारादेई भी तहरीर स्क्वायर पर प्रदर्शनकारियों का साथ देने पहुंचे और होस्नी मुबारक को फ़ौरन सत्ता छोड़ने को कहा है.

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "जिस अभियान की शुरूआत हो चुकी है, वो अब वापस नहीं हो सकता."

प्रदर्शनकारियों ने वहाँ घुसने की कोशिश कर रहे सेना के टैंकों को रोक लिया.

सेना के कई हेलिकॉप्टर सेंट्रल स्क्वेयर के आसपास के इलाक़ों में बहुत कम ऊँचाई पर उड़ रहे थे.

बारादेई ने कहा है कि अमरीका एक ओर लोकतंत्र और क़ानून की बात करते हुए दूसरी ओर मुबारक का साथ देकर अपनी विश्वसनीयता खो रहा है.

तनाव बढ़ा

मिस्र पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच सरकार ने अरबी टीवी चैनल अल जज़ीरा के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है.

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Image caption विपक्षी नेता अल बारादेई ने होस्नी मुबारक को फ़ौरन सत्ता छोड़ने को कहा है

सरकारी टीवी ने कहा है कि राष्ट्रपति मुबारक सुरक्षा इंतज़ामों पर पुनर्विचार कर रहे हैं. काहिरा में बड़ी संख्या में सैनिक तैनात हैं. सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ जमा है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि फ़िलहाल तो काहिरा में सैनिक प्रदर्शनकारियों के साथ दोस्ताना तरीके से पेश आ रहे हैं.

पिछले एक सप्ताह से मिस्र की राजधानी काहिरा और अन्य जगहों पर हो रहे प्रदर्शनों में अब तक लगभग सौ लोग मारे गए हैं.

अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चिंता व्यक्त की है. जहाँ अमरीका ने संयम की अपील की है वहीं जापान ने राष्ट्रपति होस्नी मुबारक से प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत करने को कहा है.

ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने मिस्र की सरकार से कहा है कि वह हिंसक प्रतिक्रिया से बचे और जल्द सुधारों को लागू करने को प्राथमिकता दे.

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