थेइन सेइन बने बर्मा के नए राष्ट्रपति

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Image caption पहले से ही अंदाज़ा था कि थेइन सेइन राष्ट्रपति बनेंगे.

पचास सालों के सैनिक शासन के बाद बर्मा की संसद ने एक असैनिक राष्ट्रपति नियुक्त किया है.

प्रधानमंत्री का कार्यकाल खत्म कर रहे थेइन सेइन फ़ौज के जनरल रह चुके हैं और उन्हें अब राष्ट्रपति के पद पर लाया जा रहा है.

संवाददाताओं का कहना है कि उनकी नियुक्ति ये सुनिश्चित कर रही है कि बर्मा की नई सरकार और पुराने सैनिक सरकार के काम करने के तरीके में बहुत ज़्यादा अंतर नहीं आए.

थेइन सेइन मौजूदा सेना प्रमुख और शासक थान श्वे के काफ़ी करीबी माने जाते हैं.

वैसे पिछले 20 सालों में हुए इस पहले चुनाव को महज़ दिखावा माना जा रहा है.

पहले से ही अंदाज़ा था कि थेइन सेइन राष्ट्रपति बनेंगे. संसद ने पांच उम्मीदवारों की सूची तैयार की थी जिसमें से एक का चयन होना था.

सात नवंबर को हुए चुनाव के पहले सेना के 20 उच्चाधिकारियों ने अपने पद छोड़ दिए थे और असैनिक उम्मीदवारों की तरह चुनाव में खड़े हुए.

आलोचकों का कहना है कि ये दरअसल सत्ता पर फ़ौज की पकड़ बनाए रखने का तरीका था.

थेइन सेइन नवगठित यूनियन सॉलिडैरिटी ऐंड डेवलपमेंट पार्टी के नेता के तौर पर चुनाव में उतरे थे और लगभग 77 प्रतिशत वोट उनकी पार्टी को मिले.

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Image caption माना जा रहा है कि इन चुनावों के बाद भी संसद पर पूरी तरह से सेना का नियंत्रण हो गया है.

यूएसडीपी के एक प्रवक्ता ने डेमोक्रैटिक व्हाइस ऑफ़ बर्मा को बताया: “प्रधानमंत्री के तौर पर थेइन सेइन काफ़ी अनुभवी हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से वाकिफ़ हैं.”

राष्ट्रपति के नाम के एलान के साथ बर्मा ने अपनी “लोकतांत्रिक रोडमैप” का आखिरी चरण पूरा कर लिया है और देश को सैनिक से असैनिक शासन के हाथों में सौंप दिया है.

पश्चिमी देशों और बर्मा के लोकतंत्र समर्थकों ने इस चुनाव की भारी आलोचना की है क्योंकि इन चुनावों के बाद भी संसद पर पूरी तरह से सेना का नियंत्रण हो गया है.

संसद में पहले से ही 25 प्रतिशत सीट सेना के लिए आरक्षित है.

आंग सान सू ची की नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी का इस नए संसद में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है.

सू ची की पार्टी ने 1990 में हुए चुनावों में जीत हासिल की थी लेकिन उन्हें कभी भी सत्ता में नहीं आने दिया गया.

इस बार बर्मा के मौजूदा शासक थान श्वे राष्ट्रपति के पद के लिए चुनाव में नहीं खड़े हुए लेकिन 1992 से बर्मा पर शासन कर रहे थान श्वे की आगे क्या भूमिका होगी ये स्पष्ट नहीं है.

विश्लेषकों का कहना है वो पूरी तरह से सत्ता छोड़ देंगे इसके आसार कम ही हैं और शायद सेना के प्रमुख के पद पर बने रहेंगे या फिर पर्दे के पीछे रहकर कोई महत्वपूर्ण राजनीतिक पद संभालेंगे.

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