मुबारक गए तो क्या होगा?

  • 1 फरवरी 2011
तहरीर चौक पर प्रदर्शन इमेज कॉपीरइट AP

मध्य-पूर्व में बीते सप्ताह में हुई घटनाओं के आने वाले वर्षों में गहरे परिणाम होंगे. इस क्षेत्र में मिस्र की भूमिका बदलने वाली है.

मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक़ पश्चिमी ताक़तों और अरब नेताओं के बीच गठबंधन के केंद्रीय स्तंभ रहे हैं और उनके बिना ये गठबंधन कायम नहीं रह सकता.

मुबारक एकमात्र अरब नेता हैं जिन पर इसराइल भरोसा करता है. इसराइल को डर है कि मुबारक के बिना मिस्र के साथ शांति ख़तरे में पड़ जाएगी.

राष्ट्रपति मुबारक 30 साल से मध्य-पूर्व में पश्चिम के लिए अहम व्यक्ति रहे हैं. यही वजह है कि मानवाधिकारों के निंदनीय रिकॉर्ड, संदेहास्पद चुनावों, लगभग हर किस्म के राजनीतिक विरोध को दबाने और बेक़ाबू भ्रष्टाचार के बावजूद मिस्र को अमरीका से बड़ी आर्थिक सहायता मिलती रही है.

साथ ही मुबारक को ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों से राजनीतिक समर्थन भी मिलता रहा है.

यही कुछ कारण हैं जिनकी वजह से हज़ारों लोग आज सड़कों पर उतर आए हैं.

उत्तराधिकारी का सवाल

इमेज कॉपीरइट elvis
Image caption होस्नी मुबारक के बाद जनरल उमर सुलेमान मिस्र के सबसे ताक़तवर व्यक्ति हैं.

मुबारक 82 साल के हो गए हैं और उनके सहयोगी पहले से ही इस बात पर विचार कर रहे थे कि उनके बाद क्या किया जाएगा.

उन सहयोगियों के लिए सबसे आसान पूर्वानुमान ये था कि मुबारक मौजूदा मिस्र की व्यवस्था से बिना कोई ज़्यादा छेड़छाड़ किए अपना उत्तराधिकारी चुन लें.

जो नाम सामने आ रहे थे वे मुबारक के बेटे जमाल और ख़ुफ़िया महकमे के प्रमुख जनरल उमर सुलेमान के थे. सड़कों पर उतरी भीड़ को जितनी नफ़रत होस्नी मुबारक से है उतनी ही उनके बेटे से भी है.

जनरल सुलेमान वर्षों से मिस्र में दूसरे सबसे ताक़तवर व्यक्ति रहे हैं. वे मिस्र के लिए अमरीका, इसराइल और सऊदी अरब के बीच प्रमुख संपर्क सूत्र रहे हैं.

लेकिन विरोध प्रदर्शनों के बीच सुलेमान का होस्नी मुबारक को बचाने के लिए बनी योजना के तहत उपराष्ट्रपति बनना उनके ख़िलाफ़ गया है.

जन आंदोलन के देखते हुए ये मुश्किल लग रहा है कि वर्तमान व्यवस्था मुबारक के जाने के बाद बच पाएगी.

मुस्लिम ब्रदरहुड

Image caption मोहम्मद बादी (सबसे दाएं) मुस्लिम ब्रदरहुड के नेता हैं.

मिस्र के आशावादी कहते हैं कि अगर कभी स्वतंत्र चुनाव होते हैं तो एक मज़बूत लोकतंत्र का जन्म हो सकता है.

निराशावादी कहते हैं कि मौजूदा 'पुलिस राज्य' के हटने से अव्यवस्था फैल जाएगी और इसका फ़ायदा मिस्र के जिहादी गुट उठा सकते हैं.

इन जिहादी गुटों को मुबारक ने अब तक मज़बूती से नियंत्रण में रखा है.

सत्तारूढ़ पार्टी के बाद देश में एकमात्र संगठित राजनीतिक संगठन 'मुस्लिम ब्रदरहुड' है और वे किसी भी स्वतंत्र चुनाव में बहुत बढ़िया प्रदर्शन कर सकते हैं.

जिहादियों से विपरीत 'मुस्लिम ब्रदरहुड' ये नहीं मानता कि वे पश्चिम के साथ युद्ध जैसी स्थिति में है. ये एक रूढ़िवादी, नरमपंथी और अहिंसक गुट है.

लेकिन 'मुस्लिम ब्रदरहुड' मध्य-पूर्व में पश्चिमी नीतियों का कटु आलोचक रहा है.

संबंधित समाचार