रैली के लिए लोग जुटना शुरू, सेना बल प्रयोग नहीं करेगी

  • 1 फरवरी 2011
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मिस्र में मंगलवार को मुबारक विरोधी प्रदर्शनकारियों ने पूरे देश में हड़ताल का आह्वान किया है और अपील की है कि 10 लाख से ज़्यादा लोग सड़कों पर निकलें.

दूसरी ओर सेना ने कह दिया है कि वो राष्ट्रपति होस्नी मुबारक का इस्तीफ़ा मांग रहे प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बलप्रयोग नहीं करेगी.

सेना की ओर से जारी बयान में ये भी कहा गया है कि वो प्रदर्शनकारियों की मांग को सही मानती है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यदि ये बयान सेना के उच्च अधिकारियों की सहमति से है तो इसमें कोई शक नहीं कि होस्नी मुबारक के लिए ये बहुत बड़ा धक्का है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को सेना का समर्थन हासिल हो गया और इसके बाद जानकारों को लगता है कि राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के दिन गिने चुने हैं.

इस बीच देश के उपराष्ट्रपति ने कहा है कि उन्हें देश के संविधान में बदलाव पर बातचीत का आदेश मिला है.

राष्ट्रीय टेलीविज़न पर अपने संबोधन में उमर सुलेमान ने कहा है कि राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने उनसे सभी राजनीतिक शक्तियों से बातचीत शुरू करने को कहा है.

उन्होंने कहा है कि उन इलाक़ों में फिर से चुनाव करवाए जाएंगे जहां पिछले साल हुए चुनावों में धांधली के आरोप लगे थे.

उनका कहना था कि नई कैबिनेट की प्राथमिकता होगी ग़रीबी, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार को दूर करना. प्रदर्शनकारियों की भी यही मांग है.

राष्ट्रपति मुबारक ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने के उद्देश्य से देश के गृहमंत्री को भी बर्ख़ास्त कर दिया है.

पिछले सात दिनों के प्रदर्शन में अब तक 100 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और इसका आरोप गृहमंत्री पर लगा है.

लेकिन गृहमंत्री की बर्ख़ास्तगी से भी प्रदर्शनकारी संतुष्ट नहीं हैं और मुबारक के इस्तीफ़े की मांग और जो़र पकड़ती जा रही है.

सेना की दुविधा

प्रदर्शनों के बाद से सेना के कुछ दस्ते प्रदर्शनकारियों के प्रति नर्म रूख अपनाते देखे गए हैं.

बीबीसी के सुरक्षा विश्लेषक फ़्रैंक गार्डनर का कहना है कि सेना के सामने बड़ी दुविधा है कि वो एक अलोकप्रिय राष्ट्रपति का साथ देती रहे या फिर उनसे सत्ता छोड़ देने को कहे जैसा कि ट्यूनीशिया की फ़ौज ने वहां के राष्ट्रपति से कहा था.

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Image caption सेना ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बलप्रयोग से इनकार कर दिया है

अभी प्रदर्शन उतने बड़े नहीं हुए हैं कि फ़ौज अपना समर्थन खींच ले लेकिन फ़ौज के कई दस्तों ने टैंकों पर और अपनी गाड़ियों पर प्रदर्शनकारियों को मुबारक विरोधी नारे लिखने से नहीं रोका है.

गार्डनर का कहना है कि फ़ौज की दुविधा ये भी है कि उन्हें अमरीका से हर साल 1.3 अरब डॉलर का अनुदान मिलता है और यदि मुबारक के बाद कोई इस्लामी गुट सरकार बना लेता है तो वो उस अनुदान के बंद हो जाने की आशंका है.

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू ने भी कहा है कि उन्हें डर है कि मिस्र की बागडोर किसी इस्लामी गुट के हाथ में चली जाएगी. उन्होंने कहा कि ईरान और कई अन्य जगहों पर ऐसा ही हुआ है.

लेकिन मिस्र की सेना की सबसे पड़ी परीक्षा है कि यदि प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए तो उन्हें बलप्रयोग करना पड़ सकता है लेकिन फ़िलहाल उन्होंने ऐलान कर दिया है कि वो बलप्रयोग नहीं करेंगे.

हवाईअड्डे पर अफ़रातफ़री

काहिरा के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अफ़रातफ़री का माहौल है.

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Image caption काहिरा हवाई अड्डे पर अफ़रातफ़री का माहौल है

मिस्र में मौजूद हज़ारों विदेश नागरिक देश से निकलने की कोशिश कर रहे हैं.

हवाई अड्डे पर मौजूद एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अब सेना वहां पहुंच रही है.

अमरीका, भारत, कनाडा, चीन और कुछ और देशों ने विशेष विमान से अपने नागरिकों को वहां से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

कई देशों ने अपने नागरिकों से मिस्र की यात्रा नहीं करने को कहा है.

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