तहरीर चौराहे का माहौल

  • 1 फरवरी 2011
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Image caption तहरीर चौक पर बड़ी संख्या में लोग सरकार का विरोध कर रहे हैं.

मिस्र के तहरीर चौराहे पर भले ही लोग सरकार विरोधी प्रदर्शन करने जुटे हों लेकिन कई लोगों के लिए ये एक उत्सव से कम नहीं है.

क़रीब एक हफ्ते के प्रदर्शनों के बाद अब कई लोग इसी चौराहे पर सो जाते हैं. चौराहे पर कुछ तंबू लगे हैं और यहीं एक सरकारी इमारत के सामने घार पर कार्डबोर्ड बिछाकर वो सो भी जाते हैं.

शुक्रवार से ही चौराहे पर मौजूद समाह अल ड्विक कहते हैं, ‘‘मैं सिर्फ़ चार घंटे सो पाता हूं और उसके बाद उठकर प्रदर्शन में लग जाता हूं. हमें पता नहीं कि कब तक यहीं रहना होगा. अगर मुबारक नहीं हटेंगे तो हम भी यहां से नहीं हटेंगे. हममें से कोई नहीं हटेगा. ’’

काहिरा में लगभर सारी दुकानें बंद हैं. कुछ लोगों ने चौराहे के आस पास अस्थायी दुकानें खोल ली हैं और वहां चावल और सब्ज़ी बेच रहे हैं.

कई लोग चौराहे पर अपने साथ सैंडविच और पानी की बोतलें लेकर आ रहे हैं और पानी बांट भी रहे हैं. कुछ लोग तो पिकनिक मनाने की तर्ज पर आए हैं और पूरा माहौल उत्सव जैसा हो गया है.

केंद्रीय चौराहे पर एक व्यक्ति का कहना था, ‘‘ आप देखिए कि लोग कैसे एक दूसरे से प्यार से मिल रहे हैं और समर्थन कर रहे हैं. हम अलग अलग लोग हो सकते हैं लेकिन हैं सब मिस्र के ही वासी.’’

इसी के साथ बैठे एक और व्यक्ति का कहना था कि वो तीन घंटे बस में सफर कर के काहिरा पहुंचा है ताकि वो प्रदर्शन में हिस्सा ले सके.

देश में इंटरनेट पूरी तरह से ठप है और कुछ ही लोग फेसबुक के उस पन्ने पर जा सकते हैं जो मिस्र की इस क्रांति से जुड़ा है.

ऐसे में सेटेलाइन न्यूज़ चैनलों की मदद लोगों तक ख़बर पहुंच रही है और एक फरवरी की रैली में शामिल होने लाखों की संख्या में लोग पहुंच गए हैं.

मिस्र की जनसंख्या आठ करोड़ है और ऐसे में दस लाख लोग जु़टाना मुश्किल काम हो सकता है क्योंकि सेना ने कई जगहों पर सड़को अवरुद्ध भी कर दिए हैं.

कई लोग अपने परिवार को छोड़कर प्रदर्शनों में नहीं भी जा रहे हैं क्योंकि ऐसा करने पर उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंच सकता है.

लेकिन इन सबके बीच मुबारक के इस्तीफ़े की मांग किसी के मन में कम नहीं दिख रही है.

हालांकि इजिप्शियन मूवमेंट फॉर डेमोक्रेटिक चेंज के वइल खलीली कहते हैं कि उन्हें अभी भी नहीं लगता कि मुबारक पद छोड़ेंगे.

मिस्र में इससे पहले भी कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं लेकिन इतनी बड़ी संख्या में लोग कभी नहीं जुट पाए हैं.

खलीली कहते हैं कि हर सुबह उन्हें इसी बात की चिंता होती है कि क्या आंदोलन में हिस्सा लेने बड़ी संख्या में लोग आ सकेंगे या नहीं.

लेकिन उनका मानना है कि ये सही मायनों में जनक्रांति है.

वो कहते है, ‘‘ आप लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहाट देख सकेत हैं. वो मजबूत हुए हैं. ये जनक्रांति है.’’

पहले मिस्र में लोग प्रदर्शनों में शामिल होने से डरते थे लेकिन इसबार बड़ी संख्या में ऐेसे लोग भी आगे आए हैं जो पहले इन प्रदर्शनों में हिस्सा नहीं लेते थे.

कई लोग दुनिया को अपनी बात बताना चाहते हैं तभी बड़ी संख्या में नारे अंग्रेज़ी में लिखे गए हैं.

इन नारों में जहां मुबारक के इस्तीफ़े की मांग है वहीं उन पश्चिमी देशों से कहा गया है कि मिस्र के प्रति रवैया बदलें जो मुबारक को समर्थन देते रहे हैं.

इन बैनरों में अमरीका को भी निशाना बनाया गया है.

शहर में कर्फ्यू के बावजूद बड़ी संख्या में लोग रैली में हिस्सा ले रहे हैं. लोगों को पता है कि सरकार उनकी मांगों को टालकर उनकी हिम्मत खत्म करना चाहती है लेकिन लगता नहीं कि इस बार मिस्र की जनता हार मानेगी.

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