यमन के राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ेंगे

  • 2 फरवरी 2011
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Image caption राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह 2013 के बाद पद से हट जाएंगे.

यमन के राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह ने घोषणा की है कि वे अपने राष्ट्रपति काल को नहीं बढ़ाएंगे और ना ही सत्ता अपने पुत्र को सौंपेंगे.

उनका कार्यकाल 2013 में समाप्त हो रहा है.

राष्ट्रपति सालेह यमन में उनके तीस सालों के कार्यकाल के विरोध में गुरुवार को होने वाले प्रदर्शन से पहले बोल रहे थे.

विपक्षी दल इस्लाह पार्टी ने राष्ट्रपति की पहल का स्वागत किया है लेकिन साथ ही ये भी कहा है कि कुछ और मज़बूत क़दम उठाए जाने चाहिए.

राष्ट्रपति सालेह 1978 में उत्तरी यमन के राष्ट्रपति बने थे. जब 1990 में उत्तरी और दक्षिण यमन का विलय हुआ तो वे नए गणतंत्र के राष्ट्रपति बने थे.

'कोई उत्तराधिकारी नहीं'

देश की संसद के आपातकालीन सत्र में राष्ट्रपति ने सत्ता से हटने की अपनी योजना के बारे में बताया.

उन्होंने संसद को बताया, "कार्यकाल नहीं बढ़ेगा, कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा, पीछे मुड़कर नहीं देखना है. मैं ये सब देश के हित में कर रहा हूं. देश का हित, व्यक्तिगत हित से ऊपर है."

राष्ट्रपति सालेह ने विपक्ष से सभी प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों और धरनों को रोकने का आहवान भी किया.

रैली होगी'

विपक्षी दल इस्लाह के एक नेता मोहम्मद अल-सादी ने राष्ट्रपति के प्रस्ताव पर कहा, "हम इसे सकारात्मक क़दम मानते हैं. हम अगले क़दमों का इंतज़ार करेंगे. जहां तक कल होने वाली रैली का सवाल है, वो होगी. "

ट्यूनिशिया से शुरू हुए अरब विश्व में राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों के बीच जॉर्डन के सम्राट अब्दुल्ला भी अपनी सरकार को बर्ख़ास्त कर चुके हैं और वे एक नया प्रधानमंत्री भी नियुक्त कर चुके हैं.

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