काहिरा में 'प्रस्थान दिवस' रैली, हज़ारों लोग जमा

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मिस्र में हज़ारों लोग राजधानी काहिरा के तहरीर चौक पर जमा होकर राष्ट्रपति होस्नी मुबारक़ के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

कई दिनों से तहरीर चौक पर प्रदर्शन कर रहे लोकतंत्र हिमायती लोगों ने शुक्रवार को मुबारक़ के 'प्रस्थान दिवस' का नाम दिया है.

तहरीर चौक पर इस समय पहले से अधिक सेना मौजूद है.

शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद लोगों ने 'मुबारक़ चले जाओ' के नारे बुलंद किए.

इसीबीच सरकार समर्थकों की ओर से कई विदे्शी पत्रकारों और फ़ोटोग्राफ़रों को भी निशाना बनाया गया है.

ख़बरें हैं कि सुरक्षा बलों ने कई विदेशी पत्रकारों और सहायता एजेंसियों के कर्मचारियों को हिरासत में ले रखा है.

इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने अपने कर्मचारियों को मिस्र से बाहर निकालना शुरु कर दिया है. उसके तीन सौ कर्मचारी वहाँ से जा चुके हैं और शेष वहाँ से निकलने की तैयारी कर रहे हैं.

राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के इस्तीफ़े की माँग को लेकर पिछले दस दिनों से प्रदर्शन हो रहे हैं लेकिन राष्ट्रपति मुबारक ने एक टेलीविज़न चैनल को दिए गए एक साक्षात्कार में कहा है कि वे अब सत्ता से उकता चुके हैं लेकिन इस्तीफ़ा इसलिए नहीं दे रहे हैं कि उन्हें डर है कि इससे अव्यवस्था फैल सकती है.

प्रदर्शन और झड़पें

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Image caption तहरीर चौराहे पर पिछले शुक्रवार को भी भारी संख्या में लोग जुटे थे

बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात को शुरु हुई हिंसा में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई थी और क़रीब नौ सौ से अधिक लोग घायल हो चुके हैं.

ये सिलसिला गुरुवार को दिन में भी जारी रहा.

गुरुवार को शाम ढलने के बाद भी हज़ारों प्रदर्शनकारी मध्य काहिरा में डटे हुए थे और कई लोग उन हमलों का सामना कर रहे थे जो सरकार समर्थकों की ओर से हो रहे थे.

पिछले हफ़्ते भी शुक्रवार को भारी संख्या में लोग तहरीर चौराहे पर एकत्रित हुए थे और उसके बाद से ही सरकार विरोधी प्रदर्शनों में तेज़ी आई है.

पत्रकारों और कार्यकर्ताओं पर हमले

सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों ने कई विदेशी संस्थाओं के पत्रकारों पर हमले किए हैं.

ख़बरें हैं कि उन्होंने काहिरा के ऐसे कई होटलों पर हमले किए हैं जहाँ विदेशी पत्रकार ठहरे हुए हैं.

कई पत्रकारों की लाठियों से पिटाई की गई है और उनके उपकरण तोड़ दिए गए.

न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि उनके दो पत्रकारों को गुरुवार को रात भर रोके जाने के बाद रिहा किया गया है.

पत्रकारों पर हुए हमलों की ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी, इटली और स्पेन ने और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने निंदा की है.

बान की मून ने कहा, "मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि ये जो कुछ हो रहा है वह घृणित है और बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है."

गुरुवार की शाम को कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को सेना पुलिस ने हिरासत में ले लिया गया था. इनमें ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल के कार्यकर्ता शामिल हैं.

हालांकि होस्नी मुबारक ने कहा है कि पिछले दो दिनों में हुई हिंसा के पीछे उनकी सरकार का कोई हाथ नहीं है और इस हिंसा ने उन्हें भी परेशान किया है.

'अव्यवस्था का डर'

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Image caption मुबारक पिछले तीस सालों से सत्ता संभाले हुए हैं

मिस्र में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद गुरुवार को दिए गए अपने पहले साक्षात्कार में राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने कहा है कि वे अभी पद छोड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें डर है कि देश में अव्यवस्था फैल जाएगी.

अमरीकी टेलीविज़न एबीसी न्यूज़ को दिए साक्षात्कार में होस्नी मुबारक ने कहा कि वे अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद हट जाएँगे, लेकिन वे मिस्र छोड़कर नहीं जाएँगे. उन्होंने कहा कि वे मिस्र की मिट्टी में ही मरना चाहेंगे.

उन्होंने कहा कि वे सत्ता से उकता गए हैं. होस्नी मुबारक ने चेतावनी दी कि अगर वे पद छोड़ते हैं तो उनका स्थान इस्लामी मुस्लिम ब्रदरहुड ले लेगा.

इससे पहले नवनियुक्त प्रधानमंत्री अहमद शफ़ीक़ ने देश में हुई घटनाओं के लिए माफ़ी मांगी. उन्होंने हिंसा की जाँच का वादा किया.

इस बीच सरकार ने प्रदर्शनकारियों के समक्ष एक नया प्रस्ताव रखा है.

उप राष्ट्रपति उमर सुलेमान ने राष्ट्रीय टेलीविज़न पर दिए अपने संदेश में न तो राष्ट्रपति होस्नी मुबारक और न ही उनके बेटे राष्ट्रपति पद के लिए मैदान में उतरेंगे.

अपने संदेश में उन्होंने कहा, "हम संवैधानिक और विधायिका संबंधी सुधार लागू करेंगे और हर मुद्दे के अध्ययन के लिए एक समिति का गठन करेंगे. इसके बाद हम इसकी भी जाँच करेंगे कि ऐसी घटनाएँ क्यों हुई."

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