'और बढ़ेंगीं खाद्य पदार्थों की क़ीमतें'

  • 4 फरवरी 2011
चावल

संयुक्त राष्ट्र की खाद्य और कृषि मामलों की संस्था के अनुसार दुनिया भर में खाने-पीने की चीज़ों की क़ीमत पिछले वर्ष के आखि़री सात महीनों में लगातार बढ़ती रही हैं और जनवरी में वो रिकार्ड स्तर को पहुँच गई थी.

संस्था ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि अनाज की कीमतों का बढ़ना जारी है.

वर्ष 1990 के आधार पर तैयार किए गए खाद्य सूचकांक के अनुसार सामान्य वार्षिक महंगाई दर को ध्यान में रखने के बावजूद भी महंगाई फ़िलहाल ये अपने सबसे ऊँचे स्तर पर है.

हालांकि वो अभी उस स्तर से दूर है जिसके बाद 2008 में कई देशों में खाद्य सामग्री को लेकर दंगे शुरू हो गए थे.

उन दंगों में हज़ारों लोग मारे गए थे.

कैमरून की सरकार ने तो खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए बाक़ायदा एक नियंत्रक की बहाली कर रखी है.

बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवादादाता एंड्र्यू वॉकर का कहना है कि विश्व अर्थव्यवस्था में हो रही बेहतरी और मौसम का प्रभाव बढ़ी क़ीमतों की एक वजह हो सकती है.

खाद्य संस्था के एक अधिकारी का कहना है कि क़ीमतों का बढ़ना आगे भी जारी रहेगा.

खाड़ी के देशों में शुरु हुए जन आंदोलनों का एक कारण खाने-पीने की आसमान छूती क़ीमतें भी बताई जा रही हैं.

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