मिस्र में सत्ता हस्तांतरण में प्रगति के संकेत

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एक ओर मिस्र में राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन जारी है और सरकार की ओर से आए अधिकृत बयानों में कहा गया है कि राष्ट्रपति मुबारक अभी अपना पद नहीं छोड़ेंगे.

लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि वहाँ सत्ता के हस्तांतरण को लेकर कुछ प्रगति हुई है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि मिस्र में 'विधि सम्मत' सत्ता परिवर्तन होना चाहिए और इसकी शुरुआत तत्काल होनी चाहिए.

लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि मिस्र में इसे लेकर चर्चा शुरु हो चुकी है और अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि वहाँ बातचीत के माहौल में उल्लेखनीय प्रगति हुई है.

संभावना है कि आने वाले दिनों में विपक्ष के नेता उप राष्ट्रपति उमर सुलेमान से मिलें. हालांकि इसकी संभावना नहीं है कि मुस्लिम ब्रदरहुड इस वार्ता का हिस्सा हो.

बीबीसी के काहिरा संवाददाता का कहना है कि कई दिनों के गतिरोध के बाद ये अच्छे संकेत हैं.

ओबामा की अपील

शुक्रवार को हुए एक और बड़े प्रदर्शन के बीच राष्ट्रपति ओबामा ने हालांकि ये नहीं कहा कि होस्नी मुबारक को तत्काल पद से हट जाना चाहिए लेकिन उन्होंने एक बार फिर दोहराया है कि 'एक विधिसम्मत परिवर्तन होना चाहिए और इसकी शुरुआत अभी होनी चाहिए'.

उन्होंने राष्ट्रपति होस्नी मुबारक से 'सही फ़ैसला' करने की अपील की है.

अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा वे उम्मीद करते हैं कि उथल-पुथल के इस क्षण को सरकार एक अवसर में बदलेगी.

उन्होंने कहा, "उन्हें जनता की आवाज़ सुननी चाहिए और आगे के लिए निर्णय लेना चाहिए जो विधि सम्मत हो, अर्थपूर्ण हो और गंभीर हो."

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, "एक अहम सवाल राष्ट्रपति मुबारक को ख़ुद से पूछना चाहिए कि क्या वे ऐसी विरासत छोड़ जा रहे हैं जिसमें ऐसे परिवर्तन के दौर में मिस्र अपने आपको बचा पाएगा? मुझे उम्मीद है कि आख़िर में वे सही निर्णय लेंगे."

वॉशिंगटन में राष्ट्रपति ओबामा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा, "पूरी दुनिया देख रही है."

उनका कहना था कि कि प्रदर्शनकारियों ने और प्रशासन ने जिस तरह से अपने आपको अनुशासन में रखा है उससे वे प्रभावित हुए हैं.

मिस्र में दो दिन हुए हिंसक झड़पों में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई थी और आठ सौ से अधिक लोग घायल हुए थे.

संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि 25 जनवरी से शुरु हुए प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 300 लोग मारे गए हैं और चार हज़ार से अधिक लोग घायल हुए हैं.

प्रदर्शन और सरकार का रुख़

इस बीच मिस्र से प्रधानमंत्री अहमद शफ़ीक़ ने बीबीसी से कहा है कि इस समय राष्ट्रपति का जाना अव्यवहारिक होगा.

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Image caption प्रदर्शनकारी मुबारक के तत्काल इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं

सितंबर में होने वाले चुनाव में फिर से खड़ा न होने की होस्नी मुबारक की घोषणा का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "एक तरह से राष्ट्रपति मुबारक ने पद छोड़ ही दिया है और आगे आने वाले दिनों में हमें उनकी ज़रुरत है."

जबकि अल-अरेबिया टेलीविज़न से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि इस बात की संभावना नहीं है कि राष्ट्रपति मुबारक अपना कार्यभार नव नियुक्त उपराष्ट्रपति उमर सुलेमान को सौंप दें क्योंकि संवैधानिक वजहों से राष्ट्रपति का होना ज़रुरी होगा.

इस बीच यह सुझाव आया है कि प्रदर्शनकारी मध्य काहिरा में अपनी संख्या घटा लें और सिर्फ़ शुक्रवार को बड़े प्रदर्शन करें.

अभी कहना मुश्किल है कि इस सुझाव को कौन सुन रहा है क्योंकि शुक्रवार को काहिरा के तहरीर चौराहे पर फिर एक लाख से अधिक लोग एकत्रित हुए.

इनमें महिलाएँ और बच्चे सभी शामिल थे.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सेना ने प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के लिए घेरेबंदी कर रखी थी.

दोपहर को प्रदर्शनकारियों ने 'डे ऑफ़ डिपार्चर' यानी विदाई का दिन वाला प्रदर्शन थो़ड़ी देर के लिए रोका और वहीं तहरीर चौराहे पर नमाज़ अदा की.

लेकिन नमाज़ ख़त्म होने के बाद उन्होंने 'पद छोड़ो-पद छोड़ो' के नारे लगाए. राष्ट्रभक्ति के गीत गाए और झंडे लहराए.

अंधेरा ढलने के बाद भी लोग वहाँ डटे हुए थे.

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