इस्लामी गुटों के ख़िलाफ़ कैमरन का कड़ा रूख

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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन का कहना है कि उनके देश में बहुसांस्कृतिक समाज की सोच असफल रही है. उनका कहना है कि ब्रिटेन उस सोच को छोड़ कर मज़बूती से उदारवादी पश्चिमी विचारों की रक्षा करे.

म्यूनिख में शनिवार को हो रहे सुरक्षा सम्मेलन में कैमरन ने ये भी कहा कि जो लोग लोकतंत्र और समानता की सोच को दरकिनार कर अलगाववाद फैलाते हैं उन्हें बर्दाश्त करना चरमपंथ को बढ़ावा देना है.उनका कहना है कि दुनिया को हर तरह के चरमपंथ से लड़ना चाहिए.

इसका उदाहरण देते हुए उनका कहना है कि ऐसे इस्लामी गुटों को सरकारी आर्थिक मदद बंद कर देना चाहिए जो चरमपंथ को रोकने के लिए कुछ नहीं कर रहे.

अपने भाषण में कैमरन ने कहा है कि बहुसांस्कृतिक समाज के सिद्धांत के तहत अभी तक अलग-अलग समुदायों को अलग रहने के लिए बढ़ावा दिया जाता रहा है और विवादास्पद विचारों को सुनकर भी अनदेखा कर दिया जाता है.

कड़े क़दम

प्रधानमंत्री कैमरन का ये भी इशारा था कि इस्लामी चरमपंथ को बढ़ावा दे रहे संगठनों के ख़िलाफ़ कड़े कदम उठाए जाएं.

उन्होंने कहा, “हमें इन संगठनों की सही तरीके से जांच करनी चाहिए. क्या वो वैश्विक मानवाधिकार में यकीन रखते हैं—जिसमें महिलाओं और दूसरे धर्म के लोगों के लिए भी जगह हो? क्या वो क़ानून के सामने सभी बराबर हैं के सिद्दांत को मानते हैं? क्या वो लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं? क्या वो एकता में यकीन रखते हैं या अलगाववाद में?आज इस तरह के सवाल पूछे जाने की ज़रूरत है. और अगर ये इस टेस्ट में फ़ेल होते हैं तो फिर इन संगठनों से नाता तोड़ लेना चाहिए.”

बीबीसी के राजनीतिक मामलों के संवाददाता बेन राइट का कहना है कि कैमरन ने यूरोपीय नेताओं को एक कड़ा संदेश दिया है कि “वो अपने देश की सीमाओं के अंदर जो हो रहा है उसके प्रति सजग हों.”

कैमरन ने इस्लाम धर्म और जो उनके शब्दों में “इस्लामी चरमपंथ” है उसके बीच के अंतर को स्पष्ट किया. उन्होनें कहा कि इस्लामी चरमपंथ एक ऐसी राजनीतिक सोच है जो उन लोगों को आकर्षित करती है जो अपने ही देश में जड़ों से कटा महसूस करते हैं.

कैमरन के मुताबिक, “हमें साफ़ समझने की ज़रूरत है---इस्लामी चरमपंथ और इस्लाम एक ही चीज़ नहीं है.”

कैमरन की सोच जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल की उस सोच से मेल खाती है जिसमें उन्होंने कहा था कि बहुसांस्कृतिक समाज की मौत हो चुकी है.

ब्रिटेन की सरकार इन दिनों हिंसक चरमपंथ को रोकने के लिए एक नई नीति पर काम कर रही है जिसका नाम है प्रीवेंट और ये उसकी आतंकवाद विरोधी रणनीति का हिस्सा है.

कैमरन का कहना था, “हम अपने समाज की ऐसी तस्वीर पेश करने में नाकामयाब रहे हैं जिसका वो हिस्सा बनना चाहेंगे. और हमने ऐसे अलग-थलग रह रहे समुदायों को भी बर्दाश्त किया है जिनका बर्ताव हमारे मूल्यों के ख़िलाफ़ है.सही मायने में समावेश तभी होगा जब लोग ये कहेंगे कि मैं मुस्लिम हूं, मैं हिंदू हूं, मैं ईसाई हूं लेकिन मैं लंदनवासी भी हूं.”

ब्रिटेन में पिछले कुछ समय से लगातार ये बहस चल रही है कि देश की उदारवादी नीतियों का चरमपंथियों ने ग़लत फ़ायदा उठाया है और देश को और मानवाधिकारों को बहुसांस्कृतिक समाज की आड़ लेकर नुकसान पहुंचाया है.

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