संविधान की समीक्षा पर एक राय कायम

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मिस्र से आ रही खबरों के अनुसार मुस्लिम ब्रदरहुड सहित विपक्षी प्रतिनिधियों और सरकार के बीच बातचीत के दौरान संविधान की समीक्षा पर एक राय कायम हो गई है.

लगातार जारी प्रदर्शनों और राजनीतिक संकट को हल करने के लिए प्रतिबंधित विपक्षी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड, युवा प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिदल और विपक्षी नेता अल बारादाई के प्रतिनिधियों ने सरकार से बातचीत का फैसला किया था.

मिस्र के सरकारी टेलीविज़न पर जारी खबरों के अनुसार विपक्षी समूह सरकार के साथ कुछ बिंदुओं पर एकमत हुए हैं. इनमें संविधान में ज़रूरी बदलावों के लिए एक ऐसी समिति बनाए जाने की बात शामिल है जिसमें कानून और राजनीति के जानकार शामिल होंगे.

इसके अलावा शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता के हस्तांतरण और मिस्र के घटनाक्रम में किसी किस्म के विदेशी दख़ल न होने की बात पर भी सहमति बनी है.

हालांकि विपक्षी संगठनों ने फिलहाल आधिकारिक तौर पर इन फैसलों की पुष्टि नहीं की है.

नेताओं के त्यागपत्र

मिस्र की राजधानी काहिरा में राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के इस्तीफ़े की माँग कर रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी तहरीर चौराहे में जमे हैं.

इससे पहले राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शनों के बीच सत्तारुढ़ नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी के शीर्ष नेताओं ने त्यागपत्र दे दिया था. पद छोड़ने वालों में राष्ट्रपति मुबारक के बेटे गमाल मुबारक और पार्टी के महासचिव सफ़वत अल शरीफ़ भी हैं.

साथ ही अमरीकी विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रपति बराक ओबामा के विशेष दूत फ़्रैंक वाइज़नर के उस बयान से अपने आप को अलग कर लिया जिसमें उन्होंने कहा था कि अस्थायी तौर पर यदि राष्ट्रपति मुबारक अपने पद पर बने रहते हैं तो यह अमरीका को स्वीकार्य होगा.

क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड ?

अमरीकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पू्र्व राजदूत फ़्रैंक वाइज़नर की मिस्र में अब कोई आधिकारिक भूमिका नहीं है और उन्होंने जो विचार व्यक्त किए हैं वो उनके व्यक्तिगत विचार हैं.

अमरीका के उपराष्ट्रपति जो बाइडेन ने दोबारा मिस्र के उपराष्ट्रपति उमर सुलेमान से बात की है और सुधारों के ठोस एजेंडे के साथ-साथ स्पष्ट समयसारिणी की बात कही है.

मुस्लिम ब्रदरहुड की घोषणा

मुस्लिम ब्रदरहुड ने बातचीत से पहले कहा था कि वह बातचीत के ज़रिए यह सुनिश्चित करना चाहता है कि क्या प्रशासन प्रदर्शन कर रहे लोगों की माँग मानने को तैयार है.

ग़ौरतलब है कि मुस्लिम ब्रदरहुड सरकार विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय नहीं है और उसने सरकार के साथ बातचीत की बात भी अन्य विपक्षी दलों के ऐसा करने की इच्छा व्यक्त करने के बाद ही कही है.

प्रदर्शनकारी लगातार राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के इस्तीफ़े की माँग कर रहे हैं. हालाँकि राष्ट्रपति होस्नी मुबारक प्रदर्शनकारियों की इस माँग को ख़ारिज कर चुके हैं.

मुबारक गए तो क्या होगा ?

मुबारक कह चुके हैं कि यदि वे तत्काल सत्ता छोड़ देते हैं तो ये संगठन राजनीतिक अराजकता का फ़ायदा उठाएगा.

मुस्लिम ब्रदरहुड के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "हमने फ़ैसला किया है कि हम सरकार से गंभीर बातचीत करें ताकि लोगों की माँगों के प्रति अधिकारियों की गंभीरता के बारे में अंदाज़ा लगाया जा सके. ये भी पता लगाया जाए कि क्या सरकार लोगों की माँग मानने के लिए तैयार है.

टैंकों को रोका

उधर शनिवार रात को तहरीर चौंक पर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने ठंड और बारिश के बावजूद ज़मीन पर लेट कर सेना के टैंकों को आगे बढ़ने से रोक दिया.

सेना पहले ही घोषणा कर चुकी है कि वह प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग नहीं करेगी.

सेना टैंक लाकर प्रदर्शनकारियों को तहरीर चौराहे के एक कोने में सीमित करना चाहती थी ताकि बाक़ी की जगही दोबारा आम जनता के लिए खोल दी जाए.

बीबीसी के काहिरा संवाददाता का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को डर है कि यदि उन्हें एक कोने में सीमित कर दिया गया तो प्रदर्शन बेमानी हो जाएगा. उनका ये भी कहना है कि अब तक सैनिकों और प्रदर्शनाकरियों के बीच रिश्ते दोस्ताना ही बने हुए हैं.

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