'सरकार के क़दम नाकाफ़ी'

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मिस्र के विपक्षी दलों का कहना है कि देश में राजनीतिक संकट ख़त्म करने के लिए जो प्रस्ताव सरकार ने रखे हैं वे नाकाफ़ी हैं.

तेरह दिनों से चल रहे राष्ट्रपति होस्नी मुबारक़ विरोधी प्रदर्शनों के बाद मिस्र में प्रतिबंधित 'मुस्लिम ब्रदरहुड' समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार के साथ एक बातचीत में हिस्सा लिया है.

इस बातचीत में सरकार ने संविधान में संशोधन करने के लिए समिति बनाने का प्रस्ताव रखा है. विपक्ष का कहना है कि सरकार के साथ वार्ताएं केवल पहला क़दम है और सरकार ने जो पेशकश की है वो अपर्याप्त है.

राष्ट्रपति मुबारक़ तुरंत इस्तीफ़ा देने से पहले ही इंकार कर चुके हैं. उनके मुताबिक अगर वे अपना पद छोड़ते हैं तो देश में अव्यवस्था फैल जाएगी. इस्तीफ़ा देने के बजाय मुबारक़ ने सितंबर में होने वाले चुनाव में हिस्सा ना लेने की घोषणा की है.

इसीबीच रविवार को क़रीब हफ़्ते भर बाद कई बैंक खुले. बैंकों के बाहर पैसे निकालने वालों की लंबी कतारें देखीं जा सकती थीं.

विपक्ष और सरकार में बातचीत

रविवार को हुई मिस्र के उप-राष्ट्रपति उमर सुलेमान के साथ वार्ताओं में छह विपक्षी गुटों ने हिस्सा लिया. इनमें एक युवा संस्थाओं का गठबंधन भी शामिल था.

मिस्र के सरकारी टीवी चैनल का कहना है कि बातचीत में हिस्से लेने वालों ने क़ानूनी और राजनीतिक हस्तियों की संयुक्त समिति के गठन पर सहमति जताई है जो संविधान में संशोधन के सुझाव देगी.

प्रतिबंधित मुस्लिम ब्रदरहुड और सरकार के बीच ये पहली बातचीत है.

हांलाकि ब्रदरहुड ने साफ़ कर दिया है कि ये वार्ताएं तभी जारी रह सकती हैं जब सरकार उनकी मांगों पर ग़ौर करना शुरू करे.

सरकार के क़दमों पर संशय

बातचीत में हिस्सा लेने के बाद 'मुस्लिम ब्रदरहुड' के एक वरिष्ठ नेता ऐस्साम अल-अरिएन ने पत्रकारों को बताया, "हमारी मांगें अब भी वही हैं. उन्होंने हमारी अधिकतर मांगों का जवाब नहीं दिया है. कुछ ही मांगों पर सरकार ने जवाब दिया लेकिन वो भी सतही तौर पर."

काहिरा में मौजूद बीबीसी संवाददाता को विपक्ष के सदस्यों ने बताया है कि उन्हें सरकारी क़दमों पर संशय है.

बातचीत में हिस्सा लेने वाले रशद मोहम्मद अल-बेयोमी ने कहा,"हमने होस्नी मुबारक़ समेत वर्तमान प्रशासन को तुरंत हटाने, तीस साल से देश में लगे आपातकालीन क़ानूनों को ख़त्म करने, संसद को भंग करने और सभी राजनीतिक क़ैदियों को रिहा करने की मांग रखी."

मिस्र में विपक्ष की एक प्रमुख हस्ती मोहम्मद अलबारादेई सरकार और विपक्ष के बीच हुई वार्ताओं में शामिल नहीं थे लेकिन उनका एक प्रतिनिधि अलग से उप-राष्ट्रपति अली सुलेमान से मिला है.

टीवी चैनल एनबीसी के एक कार्यक्रम को अलबारादेई ने बताया कि बातचीत की प्रक्रिया 'अपारदर्शी' है.

अलबारादेई ने कहा कि वो एक वर्ष के लिए तीन सदस्यीय काउंसिल का प्रस्ताव रख रहे हैं जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होने तक देश का कामकाज देखेगी.

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