मिस्र में प्रदर्शनों के बीच, मुद्रा में भारी गिरावट

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Image caption मिस्र में जारी प्रदर्शनों में अब तक 300 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

मिस्र के सरकारी टेलिविज़न के मुताबिक नई सरकार ने अपनी पहली औपचारिक बैठक के बाद घोषणा की है कि अप्रैल महीने से सार्वजनिक क्षेत्र में मिलने वाले वेतन और पेंशन में 15 फीसदी का इज़ाफ़ा किया जाएगा.

मिस्र स्टॉक एकस्चेंज में कामकाज को रविवार 13 फरवरी तक के लिए स्थगित किए जाने के बाद मिस्र की मुद्रा में रिकार्ड गिरावट दर्ज की गई. यह गिरावट पिछले छह साल के दौरान मुद्रा में आई किसी भी गिरावट में सबसे अधिक है.

इसके साथ मिस्र में जनजीवन और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की सरकार की कोशिशों को एक बार फिर एक झटका लगा है.

काहिरा स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सरकार और अधिकारियों में इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि इस घटनाक्रम के चलते विदेशी निवेश कतराने लगेंगे.

इस बीच मिस्र में हजारों प्रदर्शनकारी अब भी तहरीर चौक पर डटे हैं. हालांकि सरकार की ओर से तीन प्रमुख शहरों में कर्फ़्यू में ढील दी गई है.

रविवार देर शाम और सोमवार सुबह को क़रीब हफ़्ते भर बाद कई बैंक खुले. बैंकों के बाहर पैसे निकालने वालों की लंबी कतारें देखी गईं.

काहिरा की सड़कों पर आवाजाही अब भी बाधित है और स्कूल बंद हैं. प्रदर्शनकारियों ने रविवार रात सेना के टैंको को रोके रखा ताकि वो उन्हें तहरीर चौक से खदेड़ न दें.

मिस्र में जारी प्रदर्शनों में अब तक 300 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

विपक्ष नाखुश

सोमवार सुबह प्रदर्शनकारियो ने तहरीर चौक पर मुगम्मा के आसपास एक मानव श्रंखला बनाई. मुगम्मा वह जगह है जहां सरकारी कामकाज होता है और प्रदर्शकारियों का मकसद था इस कामकाज को रोकना.

लगातार जारी इन प्रदर्शनों के बीच मिस्र के आम लोगों को महंगाई बढ़ने और आम ज़रूरत की चीज़ों के दाम बढ़ने का डर सता रही है.

रविवार को मुस्लिम ब्रदरहुड सहित अन्य विपक्षी दलों ने सरकार के साथ बातचीत में हिस्सा लिया. बातचीत के बाद मुस्लिम ब्रदरहुड ने कहा कि सरकार ने राजनीतिक संकट समाप्त करने के लिए कोई विशेष प्रस्ताव नहीं रखे हैं.

अन्य विपक्षी दलों का भी कहना है कि जो प्रस्ताव सरकार ने रखे हैं वे नाकाफ़ी हैं.

मुस्लिम ब्रदरहुड ने कहा है कि अब वो सरकार के साथ किसी भी बातचीत में तभी शामिल होगा जब सरकार मुबारक के इस्तीफे, संसद को भंग करने, आपातकानील कानूनों को खत्म करने और राजनीतिक बंदियों को रिहा करने की दिशा में प्रगति के संकेत देगी.

अब तक हुई बातचीत में सरकार ने संविधान में संशोधन करने के लिए समिति बनाने का प्रस्ताव रखा है.

ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति मुबारक़ तुरंत इस्तीफ़ा देने से पहले ही इनकार कर चुके हैं. उनका कहना है कि अगर वे अभी अपना पद छोड़ते हैं तो देश में अव्यवस्था फैल जाएगी.

इस्तीफ़ा देने के बजाय मुबारक़ ने सितंबर में होने वाले चुनाव में हिस्सा न लेने की घोषणा की है.

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