हज़ारों अब भी तहरीर चौक पर

  • 8 फरवरी 2011
काहिरा में प्रदर्शन इमेज कॉपीरइट AP

मिस्र में हज़ारों प्रदर्शनकारी अब भी तहरीर चौराहे पर डटे हुए हैं और राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

नवनिर्वाचित राष्ट्रपति उमर सुलेमान और विपक्ष के बीच चल रही बातचीत में भी यही अहम मुद्दा है.

सरकार की ओर से सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करने की घोषणा की है.

इस बीच मिस्र में जनजीवन सामान्य होता नज़र आ रहा है. सोमवार को बैंक खुले और लोग काम पर लौटने लगे. हालांकि मुद्रा में आई भारी गिरावट के बाद शेयर बाज़ार को 13 फ़रवरी तक बंद करने की घोषणा की गई है.

काहिरा में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अगर जनजीवन सामान्य होता है तो प्रदर्शनकारियों के सामने अप्रासंगिक होने का ख़तरा पैदा हो सकता है.

उनका कहना है कि अगर प्रदर्शनकारी अपना प्रदर्शन उग्र करते हैं तो सेना से उसका टकराव हो सकता है जो अब तक प्रदर्शनों के बीच मूक गवाह बनी रही है.

प्रदर्शन जारी

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Image caption प्रदर्शनकारी टैंकों के सामने डटे हुए हैं

प्रदर्शन के चौदहवें दिन भी हज़ारों प्रदर्शनकारी तहरीर चौक पर डटे रहे.

हालांकि सरकार की ओर से तीन प्रमुख शहरों काहिरा, अलेक्ज़ेंड्रिया और स्वेज़ में कर्फ़्यू में ढील दी गई.

हालांकि इन शहरों में स्कूल-कॉलेज अभी भी बंद हैं.

रविवार देर शाम और सोमवार सुबह को क़रीब हफ़्ते भर बाद कई बैंक खुले. बैंकों के बाहर पैसे निकालने वालों की लंबी कतारें देखी गईं.

अमरीकी संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने 28 जनवरी से अब तक के प्रदर्शनों के दौरान 297 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है.

ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि उन्होंने ये आंकड़े काहिरा, अलेक्ज़ेंड्रिया और स्वेज़ के पाँच अस्पतालों से जुटाए हैं.

संस्था की एक कार्यकर्ता हेबा मोरायेफ़ ने कहा है कि हालांकि उन्हें अन्य शहरों से भी मौतों की ख़बरें मिली हैं लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है.

इस बीच आज़ादी के लिए प्रदर्शनों में खुलकर हिस्सा ले रहे गूगल के मार्केटिंग एक्ज़ेक्यूटिव वाएल ग़ोनिम को रिहा कर दिया गया है. वे गत 28 जनवरी से लापता थे.

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