दूतावासों में 'प्रताड़ना' के संकेत

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Image caption सऊदी अरब में अमरीकी दूतावास

अमरीकी जाँचकर्ताओं का कहना है कि उन्हें ऐसी बातें पता चली हैं जिससे लगता है कि खाड़ी देशों के दूतावासों में काम कर रहे कई विदेशी कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जाता है.

खाड़ी देशों के अमरीकी दूतावासों में भारत, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों के लोग अकसर माली, बावर्ची या गार्ड का काम करते हैं.

जाँचकर्ताओं के मुताबिक ठेकेदार ग़ैर क़ानूनी तरीके से कर्मचारियों के पासपोर्ट ज़ब्त कर लेते हैं ताकि वे देश छोड़कर जा न सकें और उन्हें गंदगी भरे माहौल में रखते हैं.

जाँच अधिकारियों का कहना है कि नौकरी पर रखने के एवज़ में कई कर्मचारियों ने तो ठेकेदारों को साल भर की तन्ख़्वाह फ़ीस के तौर पर दी है.

लेकिन इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि अमरीका के मानव तस्करी क़ानून का उल्लंघन हुआ है.

'नहीं मिलता पूरा वेतन'

सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में गया है कि कुवैत, ओमान,सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में जिन 75 कर्मचारियों से बात की गई, उन सबने कहा कि वे अपनी मर्ज़ी से वहाँ आए हैं.

खाड़ी देशों के ठेकेदारों द्वारा कर्मचारियों का पासपोर्ट रखे जाने पर इन एंजेसियों ने जवाब दिया है कि जहाँ कर्मचारी रहते हैं कि वहाँ जगह की कमी होती है.

कई कर्मचारियों ने जाँचकर्ताओं को ये भी बताया है कि उन्हें वेतन नहीं दिया गया है या फिर उन्हें स्थानीय मानक अनुसार कम पैसे दिए जाते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई ठेकेादरों के रवैये के कारण विदेशी कर्मचारियों पर बुरा असर पड़ा रहा है और अमरीका की छवि भी ख़राब होती है.

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