मिस्र में संसद के प्रवेशद्वार पर जुटे प्रदर्शनकारी

मिस्र की संसद का घेराव इमेज कॉपीरइट BBC World Service

मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक़ के इस्तीफ़े की मांग कर रहे एक लाख से ज़्यादा प्रदर्शनकारी फिर से काहिरा के तहरीर चौक पर जमा हो गए हैं.

लेकिन बुधवार को ये प्रदर्शनकारी तहरीर चौक के अलावा राजधानी काहिरा के अन्य हिस्सों में भी फैल गए हैं.

सैंकड़ों प्रदर्शनकारियों ने संसद और कैबिनेट के कार्यालय समेत कई सरकारी इमारतों को घेर लिया है.

सैंकड़ों प्रदर्शनकारी संसद भवन के प्रवेशद्वार पर डटे हुए हैं. सैनिक संसद भवन की सुरक्षा कर रहे हैं और विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रूप से चल रहा है.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार प्रदर्शनकारी मौजूदा संसद को अवैध मानते हैं क्योंकि उनके अनुसार पिछले साल हुए चुनावों में भारी धांधली हुई थी.

संसद भवन की ओर जाने वाली सड़क पर लिखे बोर्ड पर पहले लिखा था 'पीपल्स असेंबली स्ट्रीट'. अब प्रदर्शनकारियों ने इस साइनबोर्ड से 'असेंबली' शब्द हटाकर 'पीपल्स स्ट्रीट' कर दिया है.

मिस्र के कई शहरों में प्रदर्शन हुए हैं. देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई है.

काहिरा में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता ने कहा है कि वहां राजसत्ता का लगातार ह्रास हो रहा है.

मज़दूरों की हड़ताल

Image caption मिस्र के कई हिस्सों से औद्योगिक अशांति की ख़बरें भी आ रही हैं.

काहिरा में प्रदर्शनकारी मिस्र के उपराष्ट्रपति उमर सुलेमान की उस चेतावनी की भी आलोचना कर रहे हैं जिसमें सुलेमान ने कहा था कि अगर संवैधानिक सुधार की कोशिशें विफल होती हैं तो देश में विद्रोह का ख़तरा पैदा हो सकता है.

उधर मध्य सागर और लाल सागर को जोड़ने वाली स्वेज़ नहर पर काम करने वाले छह हज़ार मज़दूर हड़ताल पर चले गए.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि मज़दूरों की इस हड़ताल से जहाज़ों की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

काहिरा में बीबीसी के जोन लेन के अनुसार मिस्र के कई हिस्सों से औद्योगिक अशांति की ख़बरें आ रही हैं.

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