मिस्र की हवा का असर अख़बारों पर भी

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption जिन अख़बारों पर कभी मुबारक राज करते थे वहां अब जनता की तस्वीरें हैं.

आमतौर पर सरकारी पक्ष रखनेवाले अरब जगत के अख़बारों में मिस्र में आ रहे बदलाव की गूंज है.

तीस सालों से मिस्र के अख़बारों के मुखपृष्ठ पर होस्नी मुबारक का ही चेहरा छाया रहा.

अब उनकी जगह मिस्र की जनता ने ले ली है.

देखकर अद्भुत लगता है कि दो हफ़्ते पहले मिस्र की मुख्यधारा के अख़बार क्या थे और आज क्या हैं.

दो हफ़्ते पहले यही अख़बार अपनी हर संभव कोशिश कर रहे थे तहरीर चौक और देश के अन्य भागों में हो रहे प्रदर्शनों को दबाने की.

अब वही अख़बार मिस्र के लोगों को उनकी जीत पर बधाई दे रहे हैं.

मिस्र के सबसे प्रमुख अख़बार अल अहराम ने मुखपृष्ठ पर सफ़ेद हिजाब पहने एक बूढ़ी महिला की तस्वीर छापी है जिसमें उनकी आंखों में खुशी के आंसू हैं.

मुख्य हेडलाइन है : “शहीदों के ख़ून से एक नए मिस्र का जन्म”.

जिस तरह से मिस्र की मीडिया ने पिछले कुछ दिनों में अपना रूख बदला है उससे एक संकेत मिलने लगा था कि हवा अब हमेशा के लिए होस्नी मुबारक के ख़िलाफ़ हो चुकी है.

'थैंक यू'

दूसरे अरब देशों में भी मिस्र के लोगों की तारीफ़ की गई है.

वो अख़बार जो थोड़ा हटकर लिखते रहे हैं और सालों से कुर्सी से चिपके अरब नेताओं पर हमला करते रहे हैं उनके मुखपृष्ठ पर भी जश्न का माहौल है.

अल कुद्स अल अरबी की हेडलाइन में बस दो शब्द लिखे हुए हैं: “थैंक यू.” ज़ाहिर है ये धन्यवाद मिस्र के लोगों के लिए है.

अख़बार के संपादक अबदुल बारी अतवान ने तो इससे भी एक कदम आगे बढ़कर कहा है, “मुबारक की हार से उदारवाद की धुरी ध्वस्त हुई है, इसराइल का वो दबदबा भी कम हुआ है जिसकी वजह से अरब देश उनके अधिकारियों के सामने घुटने टेकते थे और शांति की भीख मांगते थे.”

जॉर्डन और बहरीन जैसे देश में भी सरकार के ख़िलाफ़ जनआंदोलन का ख़तरा है.

वहां के अख़बार ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि कैसे उनके यहां की स्थिति मिस्र से अलग है.

उन अख़बारों ने जनता की शिकायतों को दूर करने के लिए वहां की सरकारों की ओर से जो कदम उठाए गए हैं उनको काफ़ी प्रमुखता दी है.

संबंधित समाचार