मिस्र पर अमरीका के तेवर तीखे

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राष्ट्रपति होस्नी मुबारक़ के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों के 16 दिन बाद अमरीकी प्रशासन ने मिस्र के नेतृत्व की आलोचना तेज़ कर दी है.

राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रवक्ता रॉबर्ट गिब्स ने कहा है कि मिस्र में जिन्न बोतल से बाहर आ गया है और अगर सरकार सुधार की प्रक्रिया तेज़ नहीं करती है तो यह बड़ा होता जाएगा.

इससे पहले अमरीकी प्रशासन की ओर से अपील की जा चुकी है कि मिस्र को कई दशकों से चले आ रहे आपातकालीन क़ानूनों को हटाना चाहिए.

लेकिन मिस्र के विदेश मंत्री अब्दुल अबौल ग़ेत ने अमरीकी अपील को ख़ारिज करते हुए कहा है कि अमरीका मिस्र पर अपनी मांग लाद रहा है.

इस बीच प्रदर्शनकारियों का उत्साह बरकरार है और लाखों को लोगों का तहरीर चौक पर जमा होना जारी है. बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने संसद, मंत्रिमंडल के कार्यालय सहित कई स्थानों को भी घेर रखा था.

प्रदर्शन का सिलसिला अब हड़ताल में बदल रहा है और काहिरा के बाहर इसके हिंसक होने की भी ख़बरें हैं.

ये प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति होस्नी मुबारक का इस्तीफ़ा मांग रहे हैं और वे चाहते हैं कि उन्हें तत्काल अपना पद छोड़ देना चाहिए. उन्होंने राष्ट्रपति मुबारक का ये प्रस्ताव ठुकरा दिया है कि सितंबर में होने वाले चुनाव के बाद वे अपने पद से हट जाएँगे.

अमरीका मुखर हुआ

यह साफ़ दिख रहा है कि अमरीका ने मिस्र में सत्ता परिवर्तन के लिए दबाव बनाना शुरु कर दिया है.

बुधवार को राष्ट्रपति के प्रवक्ता गिब्स ने कहा, "सरकार ने वो आवश्यक क़दम नहीं उठाए हैं जो मिस्र की जनता देखना चाहती है इसलिए और ज़्यादा लोग अपनी शिकायत दर्ज करने के लिए बाहर आ रहे हैं."

उन्होंने कहा, "यदि मिस्र की सरकार यह समझती है कि वह जिन्न को वापस बोतल में डाल देगी तो यह समय बहुत पहले बीत चुका है."

राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने कहा है कि अमरीकी सरकार मिस्र को दिए जाने वाले सहायता कार्यक्रमों पर पुनर्विचार कर रही है और यह मिस्र सरकार के सुधार प्रक्रिया पर निर्भर करेगा कि सहायता का स्वरुप कैसा होगा.

इससे पहले उपराष्ट्रपति जो बाइडन मिस्र की सरकार से कह चुके हैं कि उसे आपातकालीन क़ानूनों को हटाना चाहिए. उन्होंने सरकार से कहा था कि कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को परेशान करना भी बंद करना चाहिए.

बीबीसी के उत्तरी अमरीका के संपादक मार्क मार्डेल का कहना है कि अमरीका ने पिछले दो दिनों में अपना रुख़ बदल लिया है और अब वह नहीं मानती कि मिस्र की सरकार परिवर्तनों को लेकर गंभीर है.

उनका कहना है कि अमरीका चाहता है कि वह जो संदेश देना चाहता है वह सब तक पहुँच जाए.

प्रदर्शन जारी

बुधवार को एक बार फिर एक लाख से ज़्यादा प्रदर्शनकारी फिर से काहिरा के तहरीर चौक पर जमा हो गए हैं.

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Image caption काहिरा में प्रदर्शन का दायरा बढ़ गया है और शहर से बाहर हिंसा की भी ख़बरें हैं

लेकिन अब प्रदर्शनकारी तहरीर चौक के अलावा राजधानी काहिरा के अन्य हिस्सों में भी फैल गए.

सैंकड़ों प्रदर्शनकारियों ने संसद और मंत्रिमंडलीय के कार्यालय समेत कई सरकारी इमारतों को घेर लिया है.

सैनिक संसद भवन की सुरक्षा कर रहे हैं और विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रूप से चल रहा है.

मिस्र के कई हिस्सों से औद्योगिक अशांति की ख़बरें आ रही हैं.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार प्रदर्शनकारी मौजूदा संसद को अवैध मानते हैं क्योंकि उनके अनुसार पिछले साल हुए चुनावों में भारी धांधली हुई थी.

संसद भवन की ओर जाने वाली सड़क पर लिखे बोर्ड पर पहले लिखा था 'पीपल्स असेंबली स्ट्रीट'. अब प्रदर्शनकारियों ने इस साइनबोर्ड से 'असेंबली' शब्द हटाकर 'पीपल्स स्ट्रीट' कर दिया है.

मिस्र के कई शहरों में प्रदर्शन हुए हैं. देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई है.

काहिरा में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता ने कहा है कि वहां राजसत्ता का लगातार ह्रास हो रहा है.

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