चुनाव तक पद नहीं छोड़ेंगे मुबारक,लोगों में भारी ग़ुस्सा

  • 11 फरवरी 2011
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मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने कहा है कि वो किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव में नहीं आएंगे और चुनाव तक अपने पद पर बने रहेंगे.

उनके इस बयान के फ़ौरन बाद काहिरा के तहरीर चौक पर प्रदर्शनकारियों ने उनके ख़िलाफ़ नारे लगाने शुरू कर दिए और जूते दिखाकर अपना विरोध प्रकट करने लगे.

लोग नारे लगा रहे थे, “ उसे हटना होगा, उसे पद छोड़ना होगा.”

मुबारक के भाषण के कुछ ही देर बाद अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार समिति की बैठक बुलाई है.

मुबारक ने अपने भाषण में स्पष्ट कर दिया कि जब तक सितंबर में चुनाव नहीं हो जाते वो संविधान के तहत अपने पद पर बने रहेंगे.

उन्होंने कहा कि वो खुद अब चुनाव में नहीं लड़ेंगे.

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Image caption मुबारक ने कहा है कि वो किसी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे.

संविधान में कुछ संशोधन की बात करते हुए उन्होंने कहा कि वो अपने कुछ अधिकारों को उप-राष्ट्रपति को सौंप देंगे.

मुबारक ने युवा वर्ग को ख़ासतौर पर संबोधित करते हुए कहा कि वो उनसे उसी तरह बात करने आए हैं जैसे एक पिता अपने बच्चों से बात करता है.

उन्होंने कहा कि जो लोग प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में मारे गए हैं उनकी मौत व्यर्थ नहीं जाएगी.

उन्होंने कहा कि हिंसा के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ कार्रवाई होगी.

तहरीर चौक पर जमा हज़ारों की भीड़ को उम्मीद थी कि मुबारक गुरूवार की शाम अपना पद छोड़ने का एलान कर देंगे.

कई उच्च अधिकारियों ने भी इस तरह के संकेत दिए थे.

यहां तक कि उनकी अपनी पार्टी के सेक्रेटरी जनरल ने कह दिया था कि शुक्रवार की सुबह मुबारक शायद देश के राष्ट्रपति नहीं रहें.

लेकिन मुबारक के बयान के बाद कुछ पल के लिए मानो सन्नाटा छा गया और फिर भीड़ का गु़स्सा फूटने लगा. जहां उत्सव का माहौल था वहां निराशा सी छा गई और फिर निराशा ग़ुस्से में तब्दील हो गई.

उप-राष्ट्रपति

मुबारक के भाषण के कुछ ही देर बाद उप-राष्ट्रपति उमर सुलेमान ने भी राष्ट्र को संबोधित किया और कहा कि राष्ट्रपति ने उनपर मिस्र की स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने की ज़िम्मेदारी सौंपी है.

उन्होंने कहा कि सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण के लिए संविधान के दायरे में रहते हुए हर संभव कोशिश करेंगे और लोगों की इस क्रांति की रक्षा करेंगे.

युवाओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा, "अपने घर जाएं, अपने काम पर लौटें, देश को आपकी ज़रूरत है. विदेशी चैनलों की बात मत सुनो, अपनी आत्मा की आवाज़ सुनो और देश निर्माण में लगो."

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