मिस्र में मुबारक-बाद का जश्न

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मिस्र में शुक्रवार को ऐतिहासिक घटनाक्रम में 30 साल तक सत्ता पर काबिज़ रहे होस्नी मुबारक ने राष्ट्रपति पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

मिस्र की राजधानी काहिरा समेत विभिन्न शहरों में 18 दिनों तक आम लोगों के प्रदर्शनों ने होस्नी मुबारक़ को ये क़दम उठाने पर विवश कर दिया.

मिस्र के घटनाक्रम का अनेक देशों ने स्वागत किया

तस्वीरें: मुबारक के इस्तीफ़े के बाद मिस्र में जश्न

राष्ट्रपति मुबारक काहिरा छोड़कर शर्म अल शेख़ चले गए और उपराष्ट्रपति उमर सुलेमान ने सरकारी टेलीविज़न पर घोषणा की कि फ़िलहाल राष्ट्रपति का कार्य सैन्य परिषद संभालेगी.

इस घोषणा के बाद जहाँ मिस्र के भीतर जश्न मनाया जाने लगा वहीं दुनिया के अनेक देशों ने मुबारक के इस्तीफ़े का स्वागत किया.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा, "मुबारक का इस्तीफ़ा मिस्र में बदलाव का अंत नहीं बल्कि एक शुरुआत है...सेना को अब देश में आपातकाल ख़त्म कर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने चाहिए."

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा कि आख़िरकार मिस्र के लोगों की आवाज़ को सुनना ही पड़ा.

होस्नी मुबारक: अर्श से फ़र्श तक

मिस्र में विपक्षी नेता मोहम्मद अल-बारादेई ने इस अपनी ज़िंदगी का सबसे महत्वपूर्ण दिन बताया और मुबारक के इस्तीफ़े पर ख़ुशी ज़ाहिर की है.

पश्चिमी देशों, पूरे क्षेत्र के लिए सबक

मध्य पूर्व मामलों के विश्लेषक रॉजर हार्डी ने कहा है, "मुबारक तो अपनी समस्याएँ सेना की झोली में डाल कर चले गए हैं. ये स्पष्ट नहीं है कि क्या सेना इस स्थिति को बेहतर तरीके से सुलझा सकती है या फिर अपनी एकजुटता भी बनाए रख सकती है."

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Image caption मिस्र का लगभग हर वर्ग आंदोलनकारियों के साथ नज़र आया

उनका कहना है, "(मिस्र में) जनता की ताकत की सफलता ट्यूनिशिया के मुकाबले में हर जगह अरबों के लिए ज़्यादा महत्वपूर्ण है. जिन तानाशाहों के पास छोटे-मोटे सरक्षाबल हैं वे जनभावनाओं का निशाना बन सकते हैं."

मिस्र को लेकर नए सवाल: एक विश्लेषण

रॉजर हार्डी कहते हैं, "इस संकट का तेल की कीमत, पर्यटन और विदेशी पूँजी निवेश पर भयानक असर हुआ है. मुबारक के चले जाने का अरब-इसराइल शांति प्रक्रिया, ईरान के बढ़ते प्रभाव, इस्लामी कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ संघर्ष पर असर होगा. "

वे कहते हैं, "इसी के साथ पश्चिमी देशों की दुविधा बढ़ेगी क्योंकि दशकों तक वे स्थिरता को लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों पर प्राथमिकता देते आए हैं. अब इस पर पुनर्विचार हो रहा है. लेकिन सबक ये है कि जिन देशों को पश्चिम ख़ासी आर्थिक मदद देता आया है, उन पर भी उसका प्रभाव बहुत क्षीण है."

'जनता ही वैधता देती है'

ग़ौरतलब है कि गुरुवार को मुबारक ने राष्ट्र के नाम संदेश में अधिकतर अधिकार उपराष्ट्रपति उमर सुलैमान को सौंपने की घोषणा की थी लेकिन अपना त्यागपत्र नहीं दिया था. इस्तीफ़े की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी इससे क्रोधित हो गए थे और बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए थे.

मुबारक के इस्तीफ़े की घोषणा के बाद सेना के एक अधिकारी ने बयान में कहा, "जनता ही (सत्ता को) वैधता देती है, और कोई नहीं."

सेना की आला कमान की अध्यक्षता रक्षा मंत्री फील्ड मार्शल मोहम्मद हुसैन तंतावी करते हैं.

काहिरा में हज़ारों की संख्या में लोग राष्ट्रपति भवन के बाहर एकत्र हो गए और जश्न का माहौल नज़र आया.

उनका नारा था, "लोगों ने तख़्तापलट किया है." काहिरा के तहरीर चौक पर मौजूद एक महिला इस क़दर भावुक थी कि वो रोने लगी.

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उसने रोते हुए कहा, "ऐसा लग रहा है मानो ये एक सपना है." अलेक्ज़ांड्रिया के एक शहरी का कहना था कि लोग सड़कों के किनारे गाड़ी खड़ी कर एक दूसरे से गले मिले, एक दूसरे को मुबारकबाद दी और राष्ट्रगान गाने लगे.

उधर मुस्र के प्रतिबंधित संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड ने संयम बरतने के लिए सेना की सराहना की और इस घटनाक्रम को मिस्र के लोगों की जीत बताया.

जश्न से जगमग तहरीर चौंक

काहिरा में बीबीसी के संवाददाता जॉन लेयन ने कहा कि इस घोषणा से सभी लोग स्तब्ध रह गए और पूरे शहर में ड्राइवरों ने हॉर्न बजाकर और अनेक नागरिकों ने हवा में फ़ायर कर अपनी ख़ुशी का इज़हार किया.

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Image caption हज़ारों लोगों सड़कों पर निकल कर 18 दिन लगाता प्रदर्शन किए

लेकिन जॉन लेयन का ये भी कहना है कि सत्ता का सेना के हाथ में चले जाना सेना के तख़्तापलट का आभास देता है.

अनेक जगह जश्न-ख़ुशियाँ

मिस्र में ही नहीं, पूरे मध्य पूर्व और उत्तरी अफ़्रीका के अनेक देशों में ख़ुशियाँ मनाई गई हैं.

ईरान ने भी इसे 'महान जीत' कहा है. एक इसराइली अधिकारी ने उम्मीद ज़ाहिर की कि मुबारक के जाने के बाद शांतिपूर्ण इसराइल-मिस्र संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि ये बहुत बहुमूल्य क्षण है. उनका कहना था कि ये ऐसा मौका है कि ऐसी सरकार बने जो सभी लोगों को एकजुट करे और नागरिकों द्वारा संचालित लोकतांत्रिक प्रशासन कायम हो.

ग़ौरतलब है कि ट्यूनिशिया में सरकार विरोधी आंदोलन और राष्ट्रपति जिन अल आबिदीन बिन अली के सत्ता से बाहर करने के बाद 25 जनवरी को मिस्र में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरु हुए थे. प्रदर्शनकारियों ने बेरोज़गारी, ग़रीबी और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर राष्ट्रपति मुबारक का इस्तीफ़ा माँगना शुरु किया था.

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