राजनीतिक विद्रोहियों को मदद

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Image caption हिलेरी क्लिंटन ने दुनिया भर में इंटरनेट की आज़ादी का समर्थन किया है

अमरीका की सरकार निरंकुश शासन वाले देशों में राजनीतिक विरोधियों को इंटरनेट की आज़ादी हासिल करने के लिए ढाई करोड़ डॉलर की मदद देगा.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि इसके तहत इंटरनेट के ज़रिए विरोध करने वालों को तकनीक, उपकरण और ट्रेनिंग मुहैया कराई जाएगी ताकि वो सेंसरशिप या रोक का सामना कर सकें.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने इंटरनेट की स्वतंत्रता को दबाने वाले देशों से कहा है कि वो ऐसा ना करें क्योंकि इससे कोई फ़ायदा नहीं होगा.

उन्होंने अमरीका की विदेश नीतियों में इंटरनेट को प्राथमिकता देने का ऐलान अपने एक भाषण में दिया और कहा कि अमरीका विश्व भर में इंटरनेट की आज़ादी की रक्षा के लिए बाध्य है.

मिस्र में हुई क्रान्ति में इन्टरनेट के योगदान के बाद हिलेरी क्लिंटन का इंटरनेट और सोशल नेटवोर्किंग साइट पर यह पहला भाषण था.

हिलेरी क्लिंटन का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व और कई अन्य देशों में सरकार विरोधी आंदोलन शुरू करने के लिए सोशल नेटवोर्किंग साइटों का सहारा लिया जा रहा है.

इसको देखते हुए अमरीका ने इंटरनेट की स्वतंत्रता को प्राथमिकता देने का फैसला किया है.

हिलेरी क्लिंटन ने अपने भाषण में कहा, ''इंटरनेट की स्वतंत्रता की रक्षा लोगों के मानव अधिकार की तरह है और हम इसके लिए वचनबद्ध हैं. हम जैसा कहते हैं वो करते भी हैं. हमारे दूतावासों में और हमारे राजनयिकों के रोज़ के कामों में इंटरनेट की स्वतंत्रता की रक्षा करना और इससे पैदा होने वाले ख़तरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करना शामिल हैं. वो हमारे दूतावासों के द्वारा दुनिया भर में इंटरनेट की आज़ादी को फैलाने के लिए काम कर रहे हैं.’’

अमरीकी विदेश मंत्री ने आगे कहा, ‘‘अमरीका सेंसरशिप वाले इंटरनेट के माहौल में काम करने वालों की फ़िल्टर और दूसरे तकनीक का इस्तेमाल कर के मदद कर रहा है. ऐसे हैकर, ठग और तानाशाह के ख़िलाफ़ उन से एक क़दम आगे बढ़ कर मदद कर रहा है जो लोगों को इंटरनेट पर अपनी बातें कहने के कारण जेल में बंद कर देते हैं.''

हिलेरी क्लिंटन ने इंटरनेट की आज़ादी पर अंकुश लगाने वाले कुछ देशों के नाम भी लिए जिन में सीरिया, चीन, क्यूबा, वियतनाम और बर्मा शामिल हैं.

विकिलीक्स ने लाखों ख़ुफिया अमरीकी दस्तावेज़ को इंटरनेट पर छापने पर कुछ लोगों के ख़िलाफ़ अमरीकी प्रशासन की कार्रवाई के मुद्दे पर विदेश मंत्री ने कहा कि इसका इंटरनेट की आज़ादी से कोई लेना देना नहीं.

उनका कहना था, ''विकिलीक्स की शुरुआत ही दस्तावेजों की चोरी से हुई.''

उन्होंने यह भी एलान किया की उनका मंत्रालय अब अंग्रेज़ी के अलावा कई भाषाओं में ट्विटर में पैगाम प्रसारित करेगा जिनमें हिंदी भी शामिल है.

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