भारतीय छात्रों के मामले को सुलझाने की कोशिश

  • 15 फरवरी 2011
इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption अमरीका के ट्राई वैली विश्वविद्यालय में फंसे भारतीय छात्रों को लेकर आंध्र में प्रदर्शन हुए हैं

अमरीका में भारत की राजदूत मीरा शंकर ने ट्राई वैली विश्वविद्यालय के भारतीय छात्रों के बारे में अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन को जानकारी दी है. इसके पहले हिलेरी क्लिंटन ने मीरा शंकर को पूरे मामले का ब्योरा मांगा था.

कैलिफोर्निया का ये विश्वविद्यालय धोखाधड़ी के आरोप में पिछले महीने बंद हो गया था.

इस विश्वविद्यालय में लगभग 1500 छात्र थे जिनमें से 95 प्रतिशत भारतीय थे और उनमें से अधिकतर आंध्र प्रदेश से आए थे

भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव और मीरा शंकर मंगलवार को हिलेरी से मुलाकात करने वाली हैं.

भारतीय दूतावास के प्रवक्ता वीरेंद्र पॉल ने एक बयान में कहा, ''विदेश मंत्री एसएम कृष्णा और अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी के बीच 13 फ़रवरी को टेलीफ़ोन पर हुई बातचीत के बाद भारतीय राजदूत मीरा शंकर ने ट्राई वैली विश्वविद्यालय के भारतीय छात्रों से जुड़ी जानकारी विदेश मंत्री हिलेरी को दे दी है.''

इसके पहले रविवार को हिलेरी क्लिंटन की भारतीय विदेश मंत्री एमएम कृष्णा के साथ फ़ोन पर बातचीत हुई थी.

इस दौरान भी उन्होंने आश्वासन दिया था कि अमरीका सरकार भारतीय छात्रों की मदद को पूरी तरह से तैयार है.

भारत मांग कर चुका है कि बंद हुए ट्राई वैली यूनिवर्सिटी के भारतीय छात्रों को अन्य अमरीकी विश्वविद्यालयों में ले लिया जाना चाहिए.

छात्रों की परेशानी

इस विश्वविद्यालय के ख़िलाफ़ जनवरी में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी कि ये दूसरे देशों के छात्रों को अवैध ढंग से प्रवेश दे रहा है.

जांच में शिकायत सही पाई गई और इसके बाद इसके बाद ट्राई वैली को बंद कर दिया गया.

इसके बाद अमरीकी प्रशासन ने यहां पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की निगरानी रखने के लिए उन्हें रेडियो कॉलर पहनाए जिस पर भारत ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी.

भारत के विदेश मंत्रालय ने दिल्ली में अमरीका के उपराजदूत को बुला कर इस पर कड़ा विरोध प्रकट किया था.

मंत्रालय का कहना था कि ये छात्र धोखे का शिकार हुए हैं तो उनके साथ अपराधियों जैसा बर्ताव क्यों किया जा रहा है.

दूसरी ओर अमरीका के इमीग्रेशन अधिकारियों का कहना था कि केवल 18 छात्रों के पैरों में रेडियो टैग लगाए गए थे ताकि वो छानबीन के चलते देश छोड़ कर न जा सकें.

अमरीकी अधिकारी कहते हैं कि उन्होंने सभी छात्रों के पैरों में रेडियो टैग नहीं लगाए, केवल उनके ही पैरों में टैग लगाए हैं जो वीज़ा क़ानून तोड़ते हुए दूसरे राज्यों में जा कर काम करने लगे थे.

संबंधित समाचार