बहरीन: पुलिस ने धावा बोला, प्रदर्शनकारी तितर-बितर हुए

बहरीन में पर्ल चौराहा इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption बहरीन में राजशाही प्रदर्शनकारियों के निशाने पर है और चार दिन से प्रदर्शन हो रहे हैं

बहरीन में सुरक्षाकर्मियों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के एक कैंप पर धावा बोलकर, आँसू गैस और रबड़ की गोलियाँ चलाकर उन्हें तितर-बितर कर दिया है. विपक्ष के अनुसार कम से कम दो लाग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं.

पिछले चार दिनों से सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी राजधानी मानामा के मध्य में स्थित चौराहे पर एकत्र हो रहे थे.

ब्रितानी शासन से 1971 में आज़ाद हुए बहरीन में शिया मुसलमान बहुमत में हैं लेकिन अल्पसंख्यक सुन्नी समुदाय के सदस्यों का वहाँ शासन है. शियाओं का आरोप है कि उनके साथ भेदभाव होता है और कई क़ानून निष्पक्ष नहीं हैं.

सुरक्षाकर्मियों के धावा बोलने से पहले अमरीका ने बहरीन में प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा पर चिंता जताई और संयम की अपील की थी. बहरीन अमरीका का एक अहम सहयोगी देश है और वहाँ अमरीकी नौसेना का फ़िफ़्थ फ़्लीट - एक विशाल समुद्री बेड़ा वर्षों से तैनात है.

मिस्र और ट्यूनिशिया में प्रदर्शनों के बाद अब बहरीन के प्रदर्शन तूल पकड़ रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में लीबिया में भी प्रदर्शन हुए हैं और गुरुवार को वहाँ सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने बड़े प्रदर्शनों का आहवान किया है.

उधर ईरान में सोमवार को हुए प्रदर्शनों में एक व्यक्ति की मौत सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच विवाद का मुद्दा बन गई है.

सैकड़ों पुलिसकर्मी, चौराहा आँसू गैस से भरा

बहरीन में पिछले तीन दिनों में हज़ारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे हैं.

बीबीसी संवाददाता स्टीव जैकसन ने बताया है कि प्रत्यक्षदर्शियों ने राजधानी मानामा के पर्ल चौराहे में रात में सैंकड़ों पुलिसकर्मियों को दाख़िल होते देखा. उस समय प्रदर्शनकारी सोने की तैयारी में थे.

इससे पहले की प्रदर्शनकारी कुछ कर पाते, पूरा चौराहा आँसू गैस से भर गया और फिर पुलिस ने रबड़ की गोलियाँ चलानी शुरु कर दीं.

प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया गया और पीछे छूट गए उनके तंबुओं को नष्ट कर दिया गया और कई जगह उनकी तख़्तियाँ इधर-उधर पड़ी नज़र आ रही थी जिनपर नारे लिखे हुए थे.

धर्मनिरपेक्ष मानी जाने वाली वाड पार्टी के इब्राहीम शरीफ़ ने घटनास्थल से बीबीसी को बताया, "पुलिस ने बिना चेतावनी के कार्रवाई की, चाहे पूरे दिन ये अफ़वाह चल रही थीं कि हमारे पास 24 घंटे का समय है. वहाँ कैंप में सैकड़ों महिलाएँ और बच्चे मौजूद थे. वहाँ लोग तंबुओं में सो रहे हैं और पूरा चौराहा आँसू गैंस से भर गया है. लोग वहाँ पर फँसे हुए, आँसू गैस के बीच में ही सांस लेने पर मजबूर हैं."

उधर बहरीन के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता जनरल तारीक अल हसन ने एक बयान में कहा, "बातचीत का कोई विकल्प न बचने के बाद सुरक्षाकर्मियों ने पर्ल चौराहा खाली करवाया है...वे क़ानून का पालन करने से इनकार कर रहे थे."

बीबीसी संवाददाता इयन पैनल का कहना है कि इस प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि बहरीन का सुन्नी शाही खानदान इन प्रदर्शनों को अपनी सत्ता के लिए ख़तरा मान रही थी.

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