ब्रितानी चुनाव प्रणाली पर 'रेफ़रेंडम'

Image caption ब्रिटेन में जनमत संग्रह की तैयारी

ब्रिटेन की संसद ने वहाँ की चुनाव प्रणाली में परिवर्तन किए जाने के बारे में जनमत संग्रह कराए जाने को मंज़ूरी दे दी है.

इस विधेयक में संसदीय क्षेत्रों और साँसदों की संख्या भी कम किए जाने का प्रावधान है.

इस तरह ब्रिटेन में 1920 के दशक में महिलाओं को मताधिकार मिलने के बाद वहां की चुनाव प्रणाली में अब तक के सबसे बड़े बदलाव का रास्ता साफ़ हो गया है.

इस बारे में जनमत संग्रह पाँच मई को कराया जाएगा. मतदाताओं को चुनना होगा कि वे पुरानी व्यवस्था के पक्ष में हैं या उसके स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था चाहते हैं.

हाँलाकि वैकल्पिक व्यवस्था में साँसद चुनाव क्षेत्र जारी रहेंगे लेकिन मतदाता उन्हें अपनी पसंद के हिसाब से वरीयता दे सकेंगे.

अगर किसी उम्मीदवार को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो वोटों को वरीयता के हिसाब से तब तक दोबारा बाँटा जाएगा जब तक एक स्पष्ट विजेता सामने नहीं आ जाता.

लिब-डेम और कंज़रवेटिव पार्टी के संबंध

इसके समर्थक इसे एक न्यायसंगत व्यवस्था मानते हैं लेकिन इसके आलोचक कहते हैं कि इससे साझा सरकारों को बढ़ावा मिलेगा और कम महत्वपूर्ण उम्मीदवारों को वोट देने वालों की पूछ ज़्यादा हो जाएगी.

एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि इस 'रेफ़रेंडम' में संविधान संशोधन के पक्षधरों और विरोधियों के बीच बहुत ज़्यादा अंतर नहीं रहेगा.

लेकिन बहुत से मतदाताओं को तो यह भी पता नहीं है कि इस तरह का कोई जनमत संग्रह हो रहा है और इस बारे में उनका रुख़ क्या होना चाहिए.

लिबरल डेमोक्रेट्स ने कंज़रवेटिव पार्टी के साथ साझा सरकार में शामिल होने के लिए जनमत संग्रह कराए जाने की मूल शर्त रखी थी.

लेकिन अब दोनों दल दो अलग अलग पक्षों के लिए प्रचार करेंगे.

परिणाम जो भी हो यह देखना दिलचस्प होगा कि अंतिम नतीजे के बाद गठबंधन के दोनों सहयोगियों के बीच संबंध क्या करवट लेते हैं.

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