बहरीन पर अमरीका को 'गहरी चिंता'

  • 18 फरवरी 2011
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Image caption गुरुवार को मनामा में मारे गए लोगों के परिजन.

अमरीका ने बहरीन से आग्रह किया है कि वो प्रदर्शनकारियों से निपटने में नरमी से पेश आए. साथ ही अमरीका ने अरब की खाड़ी में स्थित छोटे-से देश को अर्थपूर्ण सुधार करने को भी कहा है.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन ने बहरीन के विदेशमंत्री शेख़ ख़ालिद अल-ख़लिफ़ा को फ़ोन कर गुरुवार को राजधानी मनामा में हुई घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है.

गुरुवार को बहरीन की राजधानी मनामा में प्रदर्शन कर रहे लोगों को शहर के 'पर्ल चौक' से हटाने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने बलप्रयोग किया था जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों घायल हो गए थे.

सुरक्षाबलों की कार्रवाई में मारे गए लोगों का जनाज़ा शुक्रवार को निकाला जाएगा. इसके अलावा शुक्रवार को ही एक सरकार समर्थित प्रदर्शन होने की भी संभावना है.

अमरीकी विदेशमंत्री ने बहरीन से कहा है कि शुक्रवार को होने वाली नमाज़ और जनाज़े के दौरान हिंसा नहीं होनी चाहिए.

सड़कों पर टैंक

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Image caption मनामा के पर्ल चौक पर टैंको का जमावड़ा

गुरुवार को मनामा की सड़कों पर टैंक घूमते नज़र आ रहे थे.

देश के गृहमंत्रालय ने कहा है कि सैनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर उचित क़दम उठाएंगे.

बीबीसी के मध्य-पूर्व संवाददाता जोन लेएन के अनुसार सेना के प्रयोग ने बहरीन की शिया-बहुल आबादी और सुन्नी राजघराने को आमने-सामने ला खड़ा कर दिया है. ब्रिटेन से 1971 में आज़ादी हासिल करने के बाद बहरीन में सुन्नी अभिजात वर्ग और कम अमीर शिया समुदाय के बीच झड़पें होती रहती हैं.

शिया गुटों का कहना है कि उन्हें बहरीन के ग़ैर-बराबर क़ानूनों के ज़रिए दबाया जाता है.

'गहरी चिंता'

वॉशिंगटन स्थित बीबीसी संवाददाता के अनुसार अमरीका मध्य-पूर्व के हालात को गहरी चिंता की नज़र से देख रहा है.

हांलाकि की बहरीन दस लाख से भी कम आबादी वाला एक छोटा-सा देश है लेकिन वहां अमरीकी नौसेना के पांचवे बेड़े का अड्डा है.

इसके अलावा अन्य अरब देश शिया-बहुल होने के कारण बहरीन पर ईरान का प्रभाव पड़ने से भी डरते हैं.

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