जी-20: आर्थिक असंतुलन के संकेतों पर सहमति

  • 20 फरवरी 2011
डॉलर और युआन
Image caption अमरीका और चीन के बीच मुद्रा के अवमूल्यन पर विवाद रहा है

दुनिया की 19 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और यूरोपीय संघ के समूह जी-20 की पेरिस में हुई बैठक में अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक असंतुलन के संकेतों के बारे में लंबी बहस के बाद सहमति बन गई है.

जिन संकेतों पर सहमति बनी है वे हैं सरकारी कर्ज़ा, सरकारी घाटा, निजी कर्ज़, बचत की दर और विदेशी व्यापार.

विकसित और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं की बैठक के बाद फ़्रांस की वित्त मंत्री क्रिस्टीना लागार्द ने इसे अर्थव्यस्थाओं के सुधार के आड़े आने वाले वैश्विक असंतुलन का सामना करने में पहला कदम बताया.

उनका कहना था, "वार्ता स्पष्ट और कई बार तनावपूर्ण माहौल में हुई जिसके बात अंतिम समझौता हुआ. लेकिन इसका सेहरा किसी एक प्रतिनिधिमंडल के सिर नहीं है लेकिन मं ये कह सकती हूँ कि ये समझौते और आकांक्षाओं की भावना का प्रतीक है."

फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी का कहना था, "हमने एक वैश्विक रणनीति सुझाई है. इसका मक़सद उतार-चढ़ाव का सामना करना, डेरिवेटिव्स मार्किट का संचालन करना, सामान्य बाज़ार में पारदर्शिता बढ़ाना और खाद्य सुरक्षा को मज़बूत करना है."

असंतुलन हो तो कैसी कार्रवाई?

जी-20 के देशों ने माना कि विश्व की अर्थव्यवस्था में असंतुलन है. वित्तीय संकट से पहले अर्थव्यवस्था अमरीकी और अन्य अमीर देशों के उपभोक्ताओं के ख़र्च करने पर ख़ासी निर्भर थी.

अब जब स्थिति बेहतर होनी शुरु हुई है और हर जगह पर स्थिति नहीं सुधर रही. विकासशील देशों में सुधार बेहतर हैं जबकि अमीर देशों में इसकी गति धीमी है और बेरोज़गारी ख़ासी है.

बैठक के बाद अमरीकी वित्त मंत्री टिम गैथ्नर ने कहा कि चीन की मुद्रा का मूल्य अब भी विश्व बाज़ार में बहुत कम है और कई अमीर देश मानते हैं कि इससे चीनी निर्यात को अनुचित बढ़ावा मिलता है.

बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता एंड्रयू वॉकर का कहना है कि जी-20 को अब यह तय करना होगा कि इन संकेतों का आकलन किस तरह से किया जाए और उदाहरण के तौर पर व्यापार में असंतुलन की समस्या के बारे में फ़ैसला अप्रैल तक लिया जाएगा.

अभी यह भी तय होना बाक़ी है कि यदि गंभीर असंतुलन की पहचान हो जाती है तो फिर क्या कार्रवाई की जाए, इसलिए आगे की राह और भी कठिन है.

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