‘क्रांति’ का डर, चीन ने कड़ा किया पहरा

  • 21 फरवरी 2011
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Image caption जन प्रदर्शन को नाकाम करने के लिए चीनी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया था.

जेसमिन क्रांति' की महक चीन तक पहुँचाने की कोशिश में इंटरनेट पर जारी किए अभियान को लेकर चीन के अधिकारी अब सचेत हो गए हैं.

इस अभियान के तहत चीन के 13 शहरों में लोगों से प्रदर्शन करने की अपील की गई.

चीन के सरकारी टेलिविज़न चैनल ने सत्ताधारी दल ‘कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना’ के एक सदस्य ज़ू योंगकैंग के हवाले से कहा कि आंतरिक सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों ने इस अभियान को रोकने के लिए नए और कारगर तरीका सोचने की चेतावनी दी है.

'जेसमिन क्रांति' की महक चीन पहुँचाने की कोशिश

ज़ू योंग्कैंग चीन में सुरक्षा व्यवस्था की देख रेख करते हैं.

उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वो चीन में सामाजिक अनुशासन के सुधार के लिए काम करें और किसी भी विरोध प्रदर्शन या दूसरी सामाजिक दिक्कतों का पता पहले से ही लगा लें.

चीनी समाचार एजेंसी शिनुआ के अनुसार ज़ू योंग्कैंग ने अधिकारियों से ये भी कहा कि वे चीनी लोगों के बारे में मूलभूत जानकारी के राष्ट्रीय आंकड़ें तैयार करें.

ग़ौरतलब है कि उनका ये वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब चीन में कुछ और अधिकारियों ने भी वहां के प्रशासन के सामने खड़ी चुनौतियों को लेकर चिंता जताई है.

पिछले साल आए आंकड़ों के अनुसार चीनी सरकार ने देश की प्रतिरक्षा प्रणाली पर भी उतना ही खर्च किया है, जितना कि आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने पर.

चीन की सरकारी नीतियों का विश्लेषण करने वाले एक बड़े समूह का कहना है कि 2007 से लेकर अब तक चीन में जन प्रदर्शन जैसी 90,000 घटनाएं हो चुकी हैं.

रविवार को एक जन प्रदर्शन आयोजित करने की कोशिश को नाकाम करने के लिए चीनी पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया था.

पुलिस की इसी मुहिम के तहत शंघाई में 3 लोगों को हिरासत में ले लिया गया था.

यहां तक कि कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और वकीलों को तो प्रदर्शन शुरु होने से पहले ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. हांलांकि इंटरनेट के ज़रिए बुलाए गए इस जन प्रदर्शन में ज़्यादा लोग नहीं उमड़े.

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Image caption नोबेल पुरस्कार विजेता लू शियाबाओ की पत्नी ने आरोप लगाया है कि उन्हें बंधक बना लिया गया है.

लोगों का कहना है कि चीन में बड़े स्तर के जन प्रदर्शन के आयोजित होने की संभावना कम ही है और सरकार सिर्फ अफवाहों के आधार पर ही कार्रवाई कर रही है. फिलहाल इंटरनेट के साथ साथ सड़कों पर भी सरकार का कड़ा पहरा है.

उधर नोबेल पुरस्कार विजेता लू शियाबाओ की पत्नी ने चीनी प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उन्हें और उनके परिवार को बंधक बना लिया गया है.

लू इस समय चीन की एक जेल में देशद्रोह के आरोप में 11 साल की सज़ा काट रहे हैं.

जब लू शियाबाओ को नोबेल पुरस्कार दिया जाने की घोषणा हुई थी, तब उनकी पत्नी लू शिया को उनके घर में नज़रबंद कर लिया गया था, जिसके चलते पिछले चार महीनों से उनका बाहरी दुनिया से संपर्क ख़त्म हो चुका है.

बीबीसी को मिली जानकारी के अनुसार लू शिया को चंद मिनटों के लिए कंप्यूटर के ज़रिये अपनी मित्र से बातचीत करने की इजाज़त दी गई थी.

बीबीसी इन आरोपों की पुष्टि तो नहीं कर सकता लेकिन उनके मित्र से हुई बातचीत के लिखित अंश बीबीसी के पास हैं.

बातचीत में लू शिया ने कहा कि वे बाहर नहीं जा सकतीं और उनके पूरे परिवार को बंदी बना लिया गया है.

उन्होंने कहा कि उनकी हालत बेहद दयनीय है और वे कभी-कभी रो पड़ती हैं. उन्होंने अपने मित्र को ये भी नसीहत दी कि वे दोबारा इंटरनेट पर ऑनलाइन न आएं क्योंकि उनके पूरे परिवार को खतरा हैं.

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