गद्दाफ़ी ने कहा: 'कुचल डालो तिलचट्टों को'

  • 23 फरवरी 2011
लीबिया में प्रदर्शनकारी

लीबिया में फ़ैलते सरकार विरोधी प्रदर्शनों और तेज़ी से बदलते घटनाक्रम में जहाँ संयुक्त राष्ट्र ने सरकार के बल प्रयोग की कड़ी निंदा की है, वहीं कर्नल गद्दाफ़ी ने अपने समर्थकों से कहा है कि वे सड़कों पर उतरें और प्रदर्शन कर रहे 'कॉकरोचों' पर धावा बोल दें.

मंगलवार देर रात हुई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में लीबिया की सरकार के आम नागरिकों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग की निंदा की और अपील की कि ऐसा करने वालों को दंड मिलना चाहिए. मानवाधिकार संस्थाओं के अनुसार लीबिया में कम से कम 300 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं.

लेकिन संयुक्त राष्ट्र में लीबियाई प्रतिनिधिमंडल के अनुरोध पर बुलाई गई बैठक में प्रतिनिधिमंडल की लीबिया को 'नो फ़्लाइंग ज़ोन' घोषित किए जाने की अपील पर सुरक्षा परिषद ने कुछ नहीं कहा है.

ग़ौरतलब है कि 20 वर्ष पहले अमरीकी बमबारी में क्षतिग्रस्त हुई एक इमारत से देश को संबोधित करते हुए लीबियाई नेता कर्नल गद्दाफ़ी ने सरकारी टीवी पर कहा कि उनके पास कोई पद नहीं है इसलिए उनके इस्तीफ़ा देने का कोई सवाल नहीं पैदा होता.

जहाँ एक ओर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कई लीबियाई राजनयिक और नेता लामबंद हो गए हैं और गृह मंत्री अब्देल फ़ताह यूनेस ने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है, वहीं कर्नल गद्दाफ़ी ने चेतावनी दी है कि 'लीबिया के ख़िलाफ़ जो हथियार उठाएगा उसे जान से मार दिया जाएगा.'

'नो फ़्लाइंग ज़ोन' पर चुप्पी

संयुक्त राष्ट्र में लीबिया के उप राजदूत इब्राहीम उमर अल दब्बाशी ने संयुक्त राष्ट्र के बयान की सराहना की है लेकिन साथ ही देश के पश्चिमी भाग में और हिंसा होने की चेतावनी भी दी है.

इससे पहले अनेक अन्य राजनयिकों के साथ उन्होंने प्रदर्शन कर रहे आम नागरिकों का साथ देने की घोषणा की थी.

सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों ने लीबियाई सरकार के ख़िलाफ़ कड़े बयान का समर्थन किया है.

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट ने कहा दब्बाशी के हवाले से बताया कि बयान और कड़ा हो सकता था लेकिन फिर भी सख़्त संदेश देता है.

उधर न्यूयॉर्क स्थित ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि सुरक्षा परिषद का बयान एक सकारात्मक पहला क़दम है.

इस मानवाधिकार संस्था ने कहा बयान अभी भी कड़ी पुख़्ता कार्रवाई से कुछ दूर है. ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि निशाना साध कर प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए, सुरक्षा परिषद को लीबिया में हो रहे कथित अत्याचारों की जाँच का समर्थन करना चाहिए.

'अड्डों में घुसकर हमले करें'

कर्नल गद्दाफ़ी ने सरकारी टीवी पर अपने संबोधन में कहा, "मैं एक क्रांतिकारी हूँ, राष्ट्रपति नहीं, इसलिए कोई पद छोड़ने का प्रश्न नहीं उठता है. अपने घरों से बाहर आएँ, इन लोगों (सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों) पर इनके अड्डों में घुसकर हमले करें. अपने बच्चों को सड़कों पर न आने दें. ये लोग तुम्हारे बच्चों को नशीले पदार्थ दे रहे हैं. एक-एक घर जाकर लीबिया को साफ़ करें."

उन्होंने गंभीर चेतावनी देते हुए कहा, "यदि परिस्थितियाँ ऐसी रहीं तो हम अंतरराष्ट्रीय क़ानून और लीबिया के संविधान के मुताबिक बल प्रयोग करेंगे. देश में गृह युद्ध हो सकता है और यदि प्रदर्शन जारी रहे तो फिर यहाँ अमरीका का कब्ज़ा भी हो सकता है."

लगभग एक घंटे तक चले भाषण में उनका कहना था कि यदि किसी ने देश की अखंडता के साथ खिलवाड़ किया तो उसे जान से मार दिया जाएगा.

'लगभग पूरे क्षेत्र पर विपक्ष का कब्ज़ा'

बीबीसी के रक्षा मामलों के संवाददाता फ़्रैंक गार्डनर का कहना है, "गद्दाफ़ी असलियत से काफ़ी दूर नज़र आए. मानो की वे 40 साल तक किसी गुब्बारे में ज़िंदगी बसर करते रहे हों."

लीबियाई नेता ने कहा कि उन्होंने इससे पहले थल सेना को बल प्रयोग की इजाज़त नहीं दी थी. हालाँकि विपक्ष का दावा है कि कम से कम 500 लोग मारे जा चुके हैं और लगभग 1000 लोग लापता हैं.

लीबिया में विदेशी पत्रकारों को त्रिपोली से बाहर जाने की इजाज़त नहीं है. उन पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं और जो जानकारी बाहर आ रही है उसकी पुष्टि कर पाना काफ़ी मुश्किल है.

बीबीसी संवाददाता जोन लेयन का कहना है कि लगभग पूरा क्षेत्र पर विपक्ष के कब्ज़े में नज़र आ रहा है और लोग अनेक जगहों पर ख़ुशियाँ मना रहे हैं.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

संबंधित समाचार