एक परिवार और बस एक कुत्ता

कुत्ता इमेज कॉपीरइट The Kennel Club Picture Library

चीन के शहर शंघाई ने 'प्रति परिवार में एक बच्चा' की नीति का अनुसरण करते हुए 'हर घर में एक कुत्ता' के नियम की घोषणा की है.

पहली मई से लागू होने वाले इस नियम के तहत लगभग छह लाख कुत्ते बेघरबार हो जाएँगे.

इस क़ानून के बारे में बहुत लंबे समय तक बहस चली.

पिछले साल एक लाख 40 हज़ार से अधिक लोगों ने पुलिस से शिकायत की कि उन्हें लावारिस कुत्ते ने काट लिया है.

शंघाई में परमिट पाए जितने कुत्ते हैं उससे चार गुना वे हैं जो ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से पाले जा रहे हैं.

इस नए क़ानून का मतलब है कि जिन लोगों ने अपने कुत्तों का पंजीकरण नहीं कराया है उन्हें उन कुत्तों से हाथ धोना पड़ेगा.

कुत्ते का परमिट

जिन लोगों के पास दो लायसेंसशुदा कुत्ते हैं वे उन्हें रख सकते हैं लेकिन अब नए प्रार्थनापत्र केवल उन घरों से स्वीकार किए जाएँगे जिनके पास एक भी कुत्ता नहीं है.

कुत्तों के आक्रामक हो कर काटने की समस्या भारत में भी आम है.

लेकिन इस बारे में जानवरों के लिए काम करने वाली संस्था फ़्रेंडीको की उपाध्यक्ष गीता सेषामणि का कहना है, "भारत में कुत्तों की नसबंदी का कार्यक्रम चलाया गया है जिसके बाद वे शांत हो जाते हैं. यह प्रक्रिया अमरीका और ब्रिटेन में भी अपनाई जाती है. शंघाई के अधिकारी भी ऐसा ही कुछ करके इस समस्या से निबट सकते थे".

हालाँकि जैसाकि चीन में बीबीसी संवाददाता क्रिस हॉग का कहना है कि चीन में लोग क़ानून को किस तरह घुमा कर काम निकाला जाता है, यह अच्छी तरह जानते हैं.

जब मकानों की क़ीमतें नीचे लाने के लिए यह पाबंदी लगी थी कि एक परिवार के पास कितने घर हो सकते हैं तो कुछ जोड़ों ने तलाक़ ले ली लेकिन साथ-साथ रहते रहे. यह सब इसलिए ताकि वे अधिक सम्पत्ति ख़रीद सकें.

पुलिस का अनुमान है कि जब बहुत सारे कुत्ते 'ग़ैरक़ानूनी' घोषित हो जाएँगे तो उनमें से कुछ की ज़िम्मेदारी उसे ही उठानी पड़ेगी.

अधिकारी ऐसे कुत्तो को रखने पर भी पाबंदी लगा रहे हैं जिन्हें उनके शब्दों में 'हमलावर कुत्ता' कहा जाता है.

ब्रिटिश बुलडॉग कुत्तों की एक ऐसी प्रजाति है जिसका इस नए क़ानून के लागू होने के बाद शायद स्वागत न किया जाए.

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