रेमंड मामला: बिगड़ सकते हैं अमरीका-पाक रिश्ते

  • 25 फरवरी 2011
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Image caption रेमंड डेविस के मामले को लेकर पाकिस्तान और अमरीका के बीच संबंधों में कड़वापन आया है

रेमंड डेविस के मामले को लेकर पाकिस्तान और अमरीका के बीच संबंधों में कड़वापन आया है और इससे दोनों देशों के बीच संबंध वाकई बिगड़ सकते हैं.

राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो रेमंड डेविस की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ हत्या के मुकदमे ने सिद्ध कर दिया है कि पाकिस्तान और अमरीका के बीच आपसी संबंध ठोस बुनियाद और घनिष्ट दोस्ती पर आधारित नहीं हैं

विशेषज्ञों के अनुसार यह रिश्ता एक दूसरे की मजबूरी है. दोनों देशों को एक दूसरे की ज़रुरत है. पाकिस्तान को अमरीकी डॉलर की और अमरीका को आतंकवाद के ख़िलाफ लड़ाई में पाकिस्तान के सहयोग की.

शायद ये संबंध ही सबसे बड़ा कारण है कि दोनों देशों को एक दूसरे पर भरोसा नहीं है.

वाशिंगटन में पाकिस्तानी मामलों के विशेषज्ञ शुजा नवाज़ के अनुसार रेमंड डेविस के मामले ने आपसी शक और अविश्वास को और भी बढ़ा दिया है.’’

वो कहते हैं, "विश्वास की कमी थी इसलिए अविश्वास अधिक बढ़ा और अब इस मामले के कारण एक दूसरे पर से भरोसा और भी कम हो गया है.

27 जनवरी को रेमंड डेविस ने लाहौर में मोटर साईकिल पर सवार दो पाकिस्तानी नागरिकों को गोली मार कर उनकी हत्या कर दी थी.

डेविस का कहना था की ये दोनों व्यक्ति उन्हें लूटना चाहते थे. लाहौर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करके उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था.

तब से रेमंड पाकिस्तान की एक जेल में क़ैद हैं. अमरीका का कहना है की वो एक राजनयिक हैं और उनकी गिरफ़्तारी वियेना कन्वेंशन के तहत ग़ैर कानूनी है.

अमरीका तब से लगातार उनकी रिहाई की मांग कर रहा है, लेकिन पाकिस्तानी सरकार का कहना है अब यह मामला उसके हाथ में नहीं है. रेमंड की रिहाई पर फ़ैसला अब सिर्फ अदालत कर सकती है.

अमरीका ने देर से ही सही लेकिन इस बात को स्वीकार कर लिया है की रेमंड डेविस लाहौर में अपने पांच साथियों के साथ अमरीकी ख़ुफिया एजेंसी सीआईए के लिए गुप्त रूप से काम कर रहे थे.

इसके बावजूद अमरीका का कहना है की रेमंड डेविस को राजनयिक छूट हासिल है इसलिए उन्हें तुरंत रिहा कर देना चाहिए.

एक अमरीकी अधिकारी के मुताबिक, ''रेमंड डेविस पाकिस्तान में राजनयिक पासपोर्ट के साथ रह रहे थे. वो अमरीकी दूतावास में प्रशासनिक कार्यप्रणाली का हिस्सा थे इसलिए उन्हें राजनयिक छूट प्राप्त है.''

विशेषज्ञ कहते हैं कि यह मामला जितना तूल पकड़ेगा दोनों देशों के बीच रिश्ते उतना ही बिगड़ते जाएंगे.

पाकिस्तान पर गहरी पकड़ रखने वाले माइकल क्रेप्टन हाल ही में पाकिस्तान के एक लंबे दौरे से लौटे हैं.

वो कहते हैं, "मुझे मालूम है की जेल में उनकी जान को ख़तरा है इसलिए दोनों देशों के बीच संबंधों को भी ज़बरदस्त ख़तरा पैदा हो सकता है."

अमरीकी प्रशासन ने रेमंड डेविस की सीआईए एजेंट होने की बात, उनकी गिरफ्तारी के 28 दिनों के बाद की कियोंकि उन्हें रेमंड की जान का ख़तरा था. प्रशासन को डर था कि पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर को अगर उनका ही अंगरक्षक मार सकता है तो रेमंड डेविस के अंगरक्षकों पर कैसे भरोसा किया जाए.

अमरीकी राजनितिक विशेषज्ञ पाकिस्तान की मजबूरी भी समझते हैं और वो ये स्वीकार करते हैं की अगर पाकिस्तानी सरकार ने रेमंड डेविस को रिहा कर दिया तो पाकिस्तानी जनता में सरकार और अमरीका दोनों के खिलाफ़ गुस्सा और भी बढ़ जाएगा.

साथ ही वो यह भी कहते हैं की अब ज़रुरत इस बात की है की मामले को ठंडा होने दिया जाए और आपसी अविश्वास को कम करने पर काम किया जाए.

Image caption भारत-अमरीका की बढ़ती दोस्ती पाक के लिए अविश्वास का कारण है.

माइकल क्रेप्टन कहते हैं की इस अविश्वास को कम करना आसान नहीं होगा, क्यूंकि इस अविश्वास के कई कारण हैं.

इन में सबसे महत्वपूर्ण कारण है भारत और अमरीका की बढ़ती हुई दोस्ती.

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान और अमरीका के बीच भरोसा, भारत की बढ़ती ताक़त और अमरीका-भारत के बीच बढ़ती साझेदारी से कम होता है. भरोसे में कमी का कारण पाकिस्तान पर ड्रोन हमले, अमरीका की पाकिस्तान में सक्रिय खुफ़िया सर्विस और अफ़ग़ानिस्तान पर दोनों देशों के बीच मतभेद भी है."

वाशिंगटन में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हक्कानी ने कुछ दिन पहले यह स्वीकार किया था की दोनों देशों के संबंधों में तनाव महसूस किया जा रहा है.

हालांकि उनके विचार में दोनों देशों के बीच रिश्ते में कई बातों का ख्याल रखना पड़ता है, "दो देशों के बीच जब दोस्ती क़ायम रखनी होती है तो इसके लिए बहुत सी चीज़ें ज़रूरी होती हैं. जैसे कभी एक पक्ष की बात मानी जाती है तो कभी दूसरे पक्ष की. हमारा काम तो यही है की तमाम दिक्क़तों के बावजूद पाकिस्तान और अमरीका के संबंधों को मज़बूत करें और पाकिस्तान के हित में इसे बेहतर किया जाए"

दूसरी तरफ अमरीका भी अपने हितों की कुर्बानी देने के लिए तैयार नहीं नज़र आता. फिलहाल दोनों देशों के बिगड़ते हुए रिश्ते को अगर कोई रोक सकता है तो वो है लाहौर की अदालत जहाँ रेमंड डेविस के ख़िलाफ अदालती कार्रवाई हो रही है.

अगर ऐसा हुआ तो दोनों देशों की सरकारें चैन की सांस ज़रूर लेंगी.

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