बामियान: मूर्ति के पुनर्निमाण की कोशिश

  • 26 फरवरी 2011
बामियान

जर्मनी के म्यूनिख़ विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर एरविन एम्मर्लिंग अफ़गानिस्तान के बामियान में बुद्ध की प्रतिमा के पुनर्निमाण की अनुमति लेने का प्रयास कर रहे हैं.

बामियान में गौतम बुद्ध की दो विशालकाय मूर्तियां थीं जिन्हें दस साल पहले तालिबान ने तबाह कर दिया था.

प्रोफ़ेसर एम्मर्लिंग कहते हैं कि तबाह की गई दो मूर्तियों में से कम से कम एक का पुनर्निमाण संभव है.

उन्होंने अपनी टीम के साथ पिछले पांच वर्षों में बामियान की कई यात्राएं की हैं. वे वहां तबाह की गई मूर्तियों का अध्ययन करते रहे हैं.

प्रोफ़ेसर एम्मर्लिंग ने दोनों मूर्तियों के लगभग चार सौ टुकड़ों की पहचान कर ली है.

उन्हें यक़ीन है कि बुद्ध की छोटी मूर्ति को दोबारा उसी जगह स्थापित किया जा सकता है जहां वो तालिबान की कार्रवाई से पहले थी.

प्रोफ़ेसर एम्मर्लिंग की योजना सिर्फ़ मूल पत्थरों का ही प्रयोग करने की है,वे मूर्ति में कोई नए पत्थर नहीं लगाना चाहते.

बेहतरीन संगतराशी की मिसाल

Image caption प्रोफ़ेसर इम्मर्लिंग को उम्मीद है कि एक मूर्ति का पुनर्निमाण संभव है.

लेकिन प्रोफ़ेसर एम्मर्लिंग को अपना पूरा करने के लिए अफ़गानिस्तान की सरकार के अलावा यूनेस्को जैसी संस्थाएं को भरोसा दिलाना होगा कि वो जो कुछ करना चाहते हैं वो सही है.

सुरक्षा कारणों से अफ़गानिस्तान सरकार की अनुमित बेहद ज़रुरी होगी.

छठी शताब्दी में निर्मित बामियान में गौतम बुद्ध की बड़ी मूर्ति 53 मीटर और छोटी 35 मीटर ऊंची थी. तालिबान प्रशासकों ने उन्हें इस्लाम के ख़िलाफ़ बताते हुए तोपों से गोले दाग़कर तबाह कर दिया था.

तालिबान की इस हरकत से दुनिया भर में लोग हैरान हुए थे.

बामियान बुद्ध के नाम से मशहूर इन पत्थर को तराश कर बनाई मूर्तियों को इतिहासकार प्राचीन काल में संगतराशी का बेहतरीन नमूना मानते हैं.

प्रोफ़ेसर एम्मर्लिंग अगले सप्ताह पेरिस में बामियान की बुद्ध प्रतिमाओं के भविष्य पर होने वाले सम्मेलन में अपना प्रस्ताव रखने वाले हैं.

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