संयुक्त राष्ट्र में कटघरे में गद्दाफ़ी

  • 27 फरवरी 2011
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में लीबिया के नेताओं के ख़िलाफ़ कई तरह के प्रतिबंध लगाने के बारे में वोटिंग होनी है.

प्रस्ताव के मसौदे में लीबिया को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कोर्ट भेजने की बात शामिल है ताकि कथित तौर पर हुई ज़्यादतियों की जाँच हो सके.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये एक संवेदनशील मामला है. चीन ने लीबिया को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कोर्ट भेजने का विरोध किया है. लेकिन ये माना जा रहा है कि चीन शायद ही प्रस्ताव का वीटो करे.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आमतौर पर एकराय है कि हथियारों की ख़रीद-फ़रोख़्त और नेताओं की यात्रा पर पाबंदी लगाई जाए और गद्दाफ़ी के समर्थकों और परिवारजनों की संपत्ति फ़्रीज़ कर दी जाए.

इस प्रस्ताव में लीबिया में नो-फ़्लाई ज़ोन बनाने की बात शामिल नहीं है. संयुक्त राष्ट्र में लीबियाई कूटनयिकों ने ये बात उठाई थी.

उधर विद्रोहियों के नियंत्रण वाले बेनगाज़ी शहर में अस्थाई सरकार के गठन की तैयारी की ख़बरें हैं. एक लीबियाई अख़बार ने पूर्व न्याय मंत्री मु्स्तफ़ा अब्दुल के हवाले से लिखा है कि तीन महीनों के अंदर चुनाव होंगे. पूर्व मंत्री ने लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा के विरोध में गद्दाफ़ी सरकार से इस्तीफ़ा दे दिया था. बताया जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र में लीबिया के राजदूत ने इस अस्थाई सरकार को अपना समर्थन दिया है.

इस बीच अमरीका ने लीबिया पर दबाव और बढ़ा दिया है. जर्मनी की चांसलर एंगला मर्केल के साथ बातचीत में ओबामा ने कहा, “एक ऐसा नेता जो सिर्फ़ इसलिए सत्ता में टिका है क्योंकि वो अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा करता है, ऐसे नेता का कोई औचित्य नहीं है और उसे तुरंत सत्ता से हट जाना चाहिए.”

‘बिखर जाएगा लीबिया’

वहीं लीबियाई नेता कर्नल गद्दाफ़ी के बेटे सैफ़ अल इस्लाम ने आगाह किया है कि अगर प्रदर्शन यूँ ही चलते रहे तो इससे लीबिया बिखर सकता है जिसके बाद लंबे समय तक स्थायित्व नहीं आ पाएगा.

सैफ़ अल इस्लाम ने पुरानी बातें दोहराते हुए कहा कि ये प्रदर्शन इस्लामिक चरमपंथियों की वजह से हो रहे हैं जिन्होंने नागरिकों को मानो अपने कब्ज़े में कर लिया है.

हालांकि इस बार उनकी टिप्पणी का तेवर कुछ बदला हुआ था. उन्होंने कहा कि वे हमेशा से ही राजनीतिक सुधार के हिमायती रहे हैं.

पर गद्दाफ़ी के बेटे ने ये नहीं कहा कि क्या वे विद्रोहियों के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं जिनका अब पूर्वी लीबिया पर नियंत्रण है.

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि पिछले 10 दिनों में हिंसा में एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

लीबिया में गद्दाफ़ी विरोधी ताकतों का दावा है कि देश के 80 फ़ीसदी हिस्से पर उनका नियंत्रण है जिसमें बेनगाज़ी शहर शामिल है.

लेकिन राजधानी त्रिपोली पर अब भी गद्दाफ़ी का कब्ज़ा है. त्रिपोली में करीब 20 लाख लोग रहते हैं.त्रिपोली से आ रही ख़बरों के मुताबिक कर्नल गद्दाफ़ी अपने समर्थकों को हथियारों से लैस कर रहे हैं ताकि वे प्रदर्शनकारियों से निपट सकें.

शहर में जगह जगह नाके बनाए गए हैं. हथियारबंद टुकडियाँ गशत लगा रही हैं और केंद्रीय चौराहा पुलिस के नियंत्रण में है.

लीबिया में फँसे हज़ारों विदेशी नागरिकों के पलायन का सिलसिला जारी है. ज़मीन, हवाई और समुद्री रास्ते से विभिन्न देश अपने नागरिकों को निकालने में जुटे हैं.

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