बढ़ती जा रही है शरणार्थियों की संख्या

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लगातार जारी हिंसा और तनाव के बीच से लीबिया से सटे देशों की सीमाओं पर शरणार्थियों की संख्या बढ़ती जा रही.

इस बीच जहाँ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने लीबियाई नेता कर्नल गद्दाफ़ी, उनके परिवारजनों और सहयोगियों के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाए हैं, वहीं त्रिपोली से 30 मील दूर स्थित ज़ाविया शहर पर गद्दाफ़ी विरोधियों ने कब्ज़ा कर लिया है.

लीबिया की सरकार रविवार सुबह पत्रकारों को ज़ाविया लेकर गई लेकिन वहाँ सरकारी सुरक्षाबलों की जगह विरोधी लड़ाकों ने नाके लगा रखे थे. एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि गद्दाफ़ी के समर्थक ज़ाविया की घेराबंदी कर रहे हैं लेकिन ज़ाविया के अंदर प्रदर्शनकारियों ने हवाई फ़ायर भी किए हैं.

हालाँकि 41 साल से सत्ता में बने हुए कर्नल गद्दाफ़ी के समर्थकों का फ़िलहाल त्रिपोली पर नियंत्रण है.

लेकिन लगभग एक लाख लोगों के लीबिया छोड़कर मिस्र और ट्यूनिशिया में भागने पर महासचिव बान की मून ने चिंता जताई है. इनमें से अधिकतर विदेशी नागरिक हैं.

दूसरी ओर ओमान में भी सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई हैं और दो लोग मारे गए हैं. राजधानी मसकट के उत्तर-पश्चिम में स्थित सोहार औद्योगिक नगर में राजनीतिक सुधारों की मांग उठा रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आँसू गैस छोड़ी है.

पूर्व में 'अंतरिम सरकार'

उधर पूर्वी लीबिया के बेनग़ाज़ी शहर में गद्दाफ़ी के विरोधियों ने अंतरिम सरकार बनाने के कदम उठाए हैं.

लीबिया के पूर्व न्याय मंत्री मुस्तफ़ा अब्देल जलील ने कहा है कि तीन महीने चुनाव कराने की तैयारी करने के लिए एक संस्था का गठन किया गया है.

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Image caption चीन के विरोध के बावजूद संयुक्त राष्ट्र ने ज्यादतियों का मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायलय को सोंपने पर सहमति जताई

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा है, "समय आ गया कि लीबियाई नेता गद्दाफ़ी अपना पद छोड़ दें."

ब्रिटेन ने ब्रितानी भूमि पर उनको दिया गया राजनियक संरक्षण वापस ले लिया है. ये आदेश उनके परिजनों पर भी लागू होते हैं.

एक लाख शरणार्थी: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लगभग एक लाख लोग लीबिया से पलायन कर रहे हैं. इनमें से अधिकतर विदेशी कर्मचारी हैं और अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस पर चिंता जताई है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि 26 हज़ार से ज़्यादा लोग भागकर ट्यूनिशिया में और 15 हज़ार विदेशी कर्मचारी भागकर मिस्र में गए हैं.

लीबिया और ट्यूनिशिया की सीमा पर मौजूद एक बीबीसी संवाददाता के अनुसार मिस्र के प्रवासी लगातार सीमा पार कर ट्यूनिशिया में आ रहे हैं और इससे मानवीय समस्या पैदा हो गई है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार शनिवार देर रात 530 भारतीयों को दो हवाई जहाज़ों से दिल्ली पहुँचाया गया है. लीबिया में लगभग 18 हज़ार भारतीय हैं.

उधर शनिवार शाम को 88 लीबिया से ट्यूनिशिया पहुँचे हैं. ये पुंज-लॉयड कंपनी के लिए काम करते हैं और इन्हें अस्थायी शिविरों में रखा गया है और फिर भारत भेजा जाएगा.

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Image caption बेनग़ाज़ी में अंतरिम सरकार बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं

भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि रविवार को लगभग 170 भारतीयों के ट्यूनिशिया में रास जिदेर पहुँचने की संभावना है.

तेल के कारखानों में काम कर रहे लगभग 150 ब्रितानी कर्मचारियों को दो हवाई जहाज़ों के ज़रिए लीबिया से बाहर निकाला गया है लेकिन अब भी 300 ब्रितानी नागरिक वहाँ फँसे हुए हैं.

गद्दाफ़ी, सहयोगियों पर अनेक प्रतिबंध

सुरक्षा परिषद में कर्नल गद्दाफ़ी की विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगाने और उनके समर्थकों और परिवारजनों की संपत्ति जब्त करने पर भी सहमति हुई है.

सुरक्षा परिषद ने लीबिया में हाल में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कथित तौर पर हुई ज़्यादतियों को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय में भेजने की मंजूरी दी है.

चीन ने लीबिया को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय में भेजने का विरोध किया था लेकिन चीन ने प्रस्ताव को वीटो नहीं किया.

दूसरी ओर लीबियाई नेता कर्नल गद्दाफ़ी के बेटे सैफ़ अल इस्लाम ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शन ऐसे ही चलते रहे तो इससे लीबिया बिखर सकता है और उसके बाद लंबे समय तक स्थायित्व नहीं आ पाएगा.

सैफ़ अल इस्लाम ने पुरानी बातें दोहराते हुए कहा कि ये प्रदर्शन इस्लामी चरमपंथियों की वजह से हो रहे हैं जिन्होंने नागरिकों को अपने कब्ज़े में कर लिया है.

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