अभियान सफल नहीं, तालिबान से वार्ता करें: ब्रितानी सांसद

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Image caption अफ़ग़ानिस्तान में तैनात नेटो के सैनिक

ब्रितानी सासंदों का कहना है कि ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अफ़ग़ानिस्तान में विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान कामयाब नहीं हो रहा है.

ब्रितानी संसद की विदेशी मामलों की समिति ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि इस अभियान के कारण एक राजनीतिक समस्या का हल खोजने में बाधाएँ आ सकती हैं और यदि हल खोजना है तो अमरीका को तालिबान से बातचीत करने के प्रयास तेज़ कर देने चाहिए.

अल क़ायदा और तालिबान के बीच के अंतर को कई बार नज़रअंदाज़ किया जाता है और कई बार उसके बारे में दुविधा होता है. लेकिन उचित अफ़ग़ानिस्तान नीति के लिए इस अंतर को समझना ज़रूरी है. हम सवाल सरकार की इस नीति पर सवाल उठाते हैं कि अल क़ायदा की वापसी की संभावना को ख़त्म करने के लिए तालिबान के ख़िलाफ़ पूर्ण शक्ति के साथ अभियान चलाना ज़रूरी है.

'अफ़ग़ान नेतृत्व में वार्ता हो'

समिति ने ब्रितानी सरकार की अफ़ग़ानिस्तान नीति पर सवाल उठाए हैं. समिति ने इस विचार को चुनौती दी है कि अल क़ायदा की वापसी की संभावना को ख़त्म करने के लिए तालिबान के ख़िलाफ़ पूर्ण शक्ति के साथ अभियान चलाना ज़रूरी है.

समिति ने सुझाया है कि राजनीतिक हल को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और अमरीकी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि वह अफ़ग़ानिस्तान में मैत्री की प्रक्रिया को बढ़ावा दे.

ब्रितानी विदेशी मंत्री विलियम हेग ने कहा है कि सरकार सैन्य और राजनितिक उपलब्धियों को और पुख़्ता करने में जुटी हुई है लेकिन राजनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के समय आ गया है.

समिति के चेयरमैन, कंज़रवेटिव पार्टी के रिचर्ड औट्वे का कहना है, "हमारा ये कहना है कि हर दिन जब हम लड़ाई लड़ते हैं तो वही समय बातचीत के लिए कम पड़ जाता है. हम अब ये चाहते हैं कि तालिबान को बातचीत के लिए प्रोत्साहित किया जाए और बातचीत में पाकिस्तान और अमरीका शामिल हो. इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व अफ़ग़ानिस्तान करे जिसके तहत इस समय भरोसे की जो कमी है उसके उलट भरोसा कायम किया जाए."

उन्होंने तेलिबान और अल क़ायदा को अलग कर के देखने पर ज़ोर देते हुए कहा, "अल क़ायदा और तालिबान के बीच के अंतर को कई बार नज़रअंदाज़ किया जाता है और कई बार उसके बारे में दुविधा होता है. लेकिन उचित अफ़ग़ानिस्तान नीति के लिए इस अंतर को समझना ज़रूरी है. हम सवाल सरकार की इस नीति पर सवाल उठाते हैं कि अल क़ायदा की वापसी की संभावना को ख़त्म करने के लिए तालिबान के ख़िलाफ़ पूर्ण शक्ति के साथ अभियान चलाना ज़रूरी है."

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