'पहले गद्दाफ़ी हटें, फिर बातचीत'

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Image caption गद्दाफ़ी सरकार में मंत्री रहे अबदेल-जलील अब विपक्ष के साथ हैं.

पूर्वी लीबिया में मौजूद विद्रोहियों ने कहा है कि वे तब तक किसी बातचीत में हिस्सा नहीं लेंगे जब तक कर्नल गद्दाफ़ी सत्ता नहीं छोड़ देते.

साथ ही लीबिया के पूर्वी शहर बेंगाज़ी में नेशनल लीबियन काउंसिल ने एक बार फिर देश में विदेशी हस्तक्षेप की मांग की है ताकि उनके समर्थकों पर हो रहे हवाई हमले रोके जा सकें.

इससे पहले ऐसी ख़बरें आई थीं कि गद्दाफ़ी ने अपने ख़ुफ़िया विभाग के प्रमुख को विद्रोहियों के साथ बातचीत शुरू करने को कहा है.

लेकिन विपक्षी गुटों का कहना है कि फ़िलहाल वार्ताओं की कोई गुंजाइश नहीं है.

बेंगाज़ी में विपक्ष का नेतृत्व लीबिया के पूर्व गृहमंत्री मुस्तफ़ा अबदेल-जलील कर रहे हैं. वे पिछले महीने विद्रोहियों से मिल गए थे.

'सिर्फ़ एक मुद्दे पर बातचीत'

अबदेल-जलील के प्रवक्ता अहमद जबरील ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "अगर कोई बातचीत होती है तो सिर्फ़ एक मुद्दे को लेकर होगी - गद्दाफ़ी कैसे देश छोड़कर जाएंगे या वो कैसे अपना पद छोड़ेंगे ताकि लोगों की जान बचाई जा सके. इसके अलावा कुछ भी बात करने योग्य नहीं है."

बेंगाज़ी में बीबीसी संवाददाता केविन कॉनॉली के अनुसार दोनों ही पक्षों के पास लीबिया के बड़े मरुस्थल में हथियार और लड़ाकों की आवाजाही सुनिश्चित करने की क्षमता नहीं है.

उनके अनुसार इस वजह से लीबिया में सैनिक गतिरोध और राजनीतिक खालीपन आने की प्रबल संभावना है.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार दोनों पक्षों में अर्थपूर्ण वार्ता होना कठिन है क्योंकि गद्दाफ़ी का एकमात्र उद्देश्य सत्ता में बने रहना है और विद्रोहियों का लक्ष्य गद्दाफ़ी के 41 सालों के राज को ख़त्म करना है.

उधर गद्दाफ़ी के गढ़ राजधानी त्रिपोली में कुछ लोगों ने शुक्रवार को जुमें की नमाज़ के बाद प्रदर्शन करने का आहवान किया है. इस बीच अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने कर्नल गद्दाफ़ी और उनके बेटों पर मानवता के विरुद्ध अपराध का मामला चलाने का फ़ैसला किया है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी एक बार फिर से गद्दाफ़ी से पद छोड़ने को कहा है.

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