सऊदी अरब में प्रदर्शनों पर संपूर्ण पाबंदी

सऊदी अरब में प्रदर्शन
Image caption पूरे अरब में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की आग अब सऊदी अरब में भी फैल रही है.

सऊदी अरब में सरकार ने अल्पसंख्यक शिया समुदाय के ज़रिए किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद पूरे देश में किसी भी तरह के प्रदर्शन और जुलूस पर पाबंदी लगाने की घोषणा की है.

शनिवार को आंतरिक मामलों के मंत्रालय की तरफ़ से सरकारी टेलिविज़न पर इसकी घोषणा की गई.

आंतरिक मंत्रालय की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है कि देश में शांति भंग करने की किसी भी कोशिश को नाकाम करने के लिए सुरक्षाकर्मी हर संभव क़दम उठाएंगें.

बयान में कहा गया है कि सऊदी अरब के क़ानून के तहत किसी तरह के विरोध प्रदर्शन, जुलूस निकालने और धरना देने की इजाज़त नहीं है क्योंकि ये इस्लामी क़ानून, सऊदी समाज की संस्कृति और मूल्यों के ख़िलाफ़ है.

बयान के अनुसार सऊदी अरब का का़नून सुरक्षाबलों को इस बात की इजा़ज़त देता है कि वो क़ानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों के ख़िलाफ़ हर संभव क़दम उठाएं.

शिया समुदाय

सऊदी अरब के पूर्वी इलाक़े में रहने वाले अल्पसंख्यक शिया समुदाय के लोग पिछले कुछ हफ़्तों से विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं.

उनकी मांग है कि बिना मुक़दमा चलाए जेलों में बंद उनके साथियों को रिहा किया जाए.

सऊदी अरब के पूर्वी इलाक़े में ही कच्चे तेल का भंड़ार पाया जाता है.

सऊदी अरब में ये घोषणा देश के राजा शाह अब्दुल्लाह के तीन महिनों के बाद विदेश से घर लौटने के बाद की गई है.

शाह अब्दुल्लाह अपना इलाज करवाने के लिए पिछले तीन महिनों से देश से बाहर थे.

सऊदी सरकार के इस क़दम को अरब दुनिया में फैल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों से देश को सुरक्षित रखने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

लेकिन इन सख्त क़दमों के इलावा सरकार ने नागरिकों को ख़ुश करने के लिए भी कुछ क़दम उठाएं हैं.

शाह अब्दुल्लाह के देश लौटने के बाद सरकार ने नागरिकों के कल्याण के लिए 37 अरब डॉलर के योजना की घोषणा की.

इन पैसों का इस्तेमाल सरकारी कर्मचारियों की तन्ख़ाह बढ़ाने,आवास योजना, और विदेशों में पढ़ने के लिए छात्रों को दी जाने वाली आर्थिक मदद के लिए किया जाएगा.

संबंधित समाचार