अफ़ग़ानिस्तान धमाके में 12 नागरिक मरे

  • 6 मार्च 2011
अमरीकी सैनिक
Image caption पख़्तिका में चरमपंथी अमरीकी सैनिकों को निशाना बनाने के लिए बम लगाते हैं

अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी पख़्तिका प्रांत में हुए बम धमाके में पांच बच्चों सहित कम से कम 12 नागरिक मारे गए हैं.

पाकिस्तान की सीमा से लगते इस प्रांत में सड़क पर लगा बम फटने से ये धमाका हुआ, जिसमें पांच लोग ज़ख्मी भी हो गए.

मारे गए नागरिक पड़ोसी देश पाकिस्तान से अफ़ग़ानिस्तान आ रहे थे.

पख्तिका प्रांत में पहुंचते ही उनका वाहन सड़क पर लगे बम से टकराया और धमाका हो गया.

मरने वालों में दो महिलाएं और पांच बच्चे शामिल हैं.

पख्तिका प्रांत के गवर्नर ने कथित रूप से तालिबान को इस हमले का ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि 'शांति के दुश्मनों ने एक बार फिर अपना क्रूर चेहरा दिखाया है.'

लेकिन तालिबान ने अभी तक इस हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं की है.

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने बम धमाके को ‘इस्लाम के सभी सिद्धांतों के ख़िलाफ़’ बताया है.

पख्तिका प्रांत विगत में भी चरमपंथियों के कई हमलों का निशाना बनता रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अमरीकी सेना को निशाना बनाने के लिए चरमपंथी अक्सर पख्तिका प्रांत का इस्तेमाल करते रहे हैं.

काबुल में विरोध

बम धमाकों में मासूम नागरिकों के मारे जाने की घटनाओं से नाराज़ लोगों ने काबुल में अमरीका विरोधी प्रदर्शन किए.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ अफ़ग़ानिस्तान में चरमपंथी सुरक्षासेना और अधिकारियों को निशाना बनाने के लिए सड़क पर बम लगाते हैं, लेकिन अक्सर मासूम नागिरक उन धमाकों की चपेट में आ जाते हैं.

इन बम धमाकों में मासूम नागरिकों के मारे जाने पर देश भर में लोगों का ग़ुस्सा भड़का है.

इसी मुद्दे को लेकर अफ़ग़ान सरकार और अमरीका के बीच भी तनातनी होती रही है.

अभी कुछ ही दिन पहले अफ़ग़ानिस्तान में नेटो के कमांडर जनरल डेविड पेट्रियस ने उन नौ लड़कों की मौत के लिए माफ़ी मांगी थी जो लकड़ियां चुनने गए थे और नेटो सैनिकों की ग़लती से मारे गए.

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