सरकारी टीवी का दावा, बड़ी सफलताएं मिलीं

  • 6 मार्च 2011
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Image caption रास लानूफ़ शहर में विद्रोहियों के पास टैंक और हथियार भी भारी मात्रा में हैं.

लीबिया के सरकारी टीवी का कहना है कि कर्नल मुअम्मर गद्दाफ़ी के वफ़ादार सैनिकों ने विद्रोहियों के ख़िलाफ़ बड़ी सफलताएं हासिल की है.

सरकारी टीवी के अनुसार सैनिकों को ज़ाविया, रास लानूफ, मिसराता और सूदूर पूर्व के तोबरूक शहरों में बड़ी सफ़लताएं मिली हैं.

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि राजधानी त्रिपोली में तड़के सुनाई पड़ी गोलियों की आवाज़ें खुशी में चलाई गई गोलियां थीं.

पिछले दो हफ़्तों में गद्दाफ़ी का विरोध कर रहे लोगों ने देश के कई शहरों पर अधिकार कर लिया था लेकिन गद्दाफ़ी लगातार इस तथ्य का खंडन करते रहे हैं.

समाचार एजेंसी एएफपी के एक संवाददाता का कहना है कि रास लानूफ अभी भी विरोधियों के कब्ज़े में है.

त्रिपोली में गोलीबारी

राजधानी त्रिपोली के बीचोबीच रविवार तड़के गोलीबारी की आवाज़ें सुनाई पड़ी हैं. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्होंने गोलीबारी की तेज़ आवाज़ों के साथ कारों के हॉर्न भी सुने हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पूरे शहर में गोलियों की आवाज़ें सुनी गईं और ये गोलियां किसी बड़े हथियार से चलाई गई लगती थीं.

अभी ये साफ नहीं है कि ये गोलीबारी किसने की. पिछले दो हफ्तों में त्रिपोली में गद्दाफ़ी के विरोध में प्रदर्शन तो हुए हैं लेकिन गोलीबारी की यह पहली घटना है.

सरकारी प्रवक्ता मूसा इब्राहिम का कहना था, '' मैं आपको आश्वस्त करता हूं. बार बार आश्वस्त करता हूं कि त्रिपोली में कोई संघर्ष नहीं हुआ है.सबकुछ सुरक्षित है. त्रिपोली सरकार के नियंत्रण में है. जो गोलियों की आवाज़ें आपने सुनीं वो उत्साह में चलाई गई गोलियां थी. लोग सड़कों पर खुशी मना रहे थे.''

त्रिपोली लीबिया के शासक मुआमार गद्दाफ़ी का गढ़ माना जाता है और माना जाता है कि विद्रोही त्रिपोली पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर सकते हैं.

इससे पहले त्रिपोली से सटे ज़ाविया शहर पर विद्रोहियों ने कब्ज़ा कर लिया था.

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Image caption लीबिया के कई शहरों पर विद्रोहियों ने कब्ज़ा कर लिया था

गद्दाफ़ी के सैनिकों ने ज़ाविया में विद्रोहियों के साथ संघर्ष भी किया है.

गद्दाफ़ी के वफ़ादार सैनिकों पर आरोप लगा है कि उन्होंने विद्रोहियों के कब्ज़े से ज़ाविया शहर को मुक्त करने की कोशिशों के दौरान आम लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलाई हैं.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इस गोलीबारी में कम से कम 30 लोग मारे गए हैं जिसमें से अधिकतर आम नागरिक थे.

एक स्थानीय डॉक्टर का कहना था कि भाड़े के सैनिकों ने टैंक और मशीन गनों से उन सभी पर गोलियां चलाई जो अपने घरों से निकले थे और इस फायरिंग में उनकी बेटी की मौत हो गई.

इससे पहले ज़ाविया के लोगों ने बीबीसी को बताया था कि शहर के बीचोबीच गोलीबारी कर रहे सरकारी टैंक कुछ समय पहले वहां से हट गए थे. ये टैंक क्यों हटे थे इसका कारण किसी को नहीं पता था.

पलायन

उधर लीबिया से विदेशियों का पलायन जारी है. अमरीका ने कहा है कि वो हज़ारों की संख्या में पलायन कर रहे विदेशी नागरिकों की मदद के लिए चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय अभियान को और तेज़ कर रहे हैं.

विदेश विभाग के अनुसार पलायन के प्रयासों का समन्वय कर रहे अंतरराष्ट्रीय संगठन को अमरीका ने तीस लाख डॉलर की मदद भी दी है.

शनिवार को ही अमरीका के चार सैन्य परिवहन विमानों ने लीबिया से ब़ी संख्या में मिस्र के नागरिकों को निकाला जो सड़क मार्ग से लीबिया की सीमा पार कर ट्यूनीशिया पहुंचे थे.

इसी बीच कनाडा की सरकार ने कहा है कि उसकी सेना भी लीबिया से कई कनाडाई नागरिकों और कुछ अन्य देशों के नागरिकों को माल्टा लाई है.

पिछले कुछ दिनों से कई देश विदेशी नागरिकों को लीबिया से निकालने के लिए विमान सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं.

Image caption गद्दाफ़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी तरह का समर्थन नहीं मिल पाया है

लीबिया की राजधानी त्रिपोली के पश्चिम में स्थित ज़ाविया शहर पर विद्रोहियों ने कब्ज़ा कर लिया था जिसके बाद गद्दाफ़ी के प्रति वफादार सैनिकों ने इस इलाक़े पर अपना कब्ज़ा करने की कोशिश की.

गद्दाफ़ी की चेतावनी

इस बीच कर्नल गद्दाफ़ी ने एक फ्रेंच अख़बार को दिए इंटरव्यू में पश्चिमी देशों को चेतावनी दी है कि अगर विद्रोह के दौर में पश्चिमी देश उनकी मदद नहीं करेंगे तो पश्चिमी देशों को बड़ी संख्या में शरणार्थियों का सामना करना पड़ेगा.

गद्दाफ़ी का कहना था कि लीबिया में जारी विद्रोह अल क़ायदा से प्रेरित है और इससे निपटने में पश्चिमी देशों को उनकी मदद करनी चाहिए.

फ्रेंच अख़बार ल जर्नल डू डिमांच के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि अस्थिर लीबिया ओसामा बिन लादेन के हाथ में जा सकता है.

इससे पहले कर्नल गद्दाफ़ी के विरोधियों ने नेशनल काउंसिल बनाकर एक समानांतर सरकार की घोषणा भी कर दी है और कहा कि यही काउंसिल लीबिया की लोगों की भावनाओं का सही प्रतिनिधित्व करती है.

इस काउंसिल की अगुआई मुस्तफ़ा अब्दल जलील कर रहे हैं और उम्मीद है कि इसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिल जाएगी. जलील का कहना था कि वो लीबिया की धरती पर विदेशी सैनिक नहीं चाहते लेकिन कर्नल गद्दाफ़ी को सत्ता से हटाने के लिए विदेशी ताकतों को हवाई हमले करने चाहिए.

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